डायबिटीज या ब्लड शुगर का अक्सर बढ़ा रहना कई तरह से मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। ऐसे मरीजों में समय के साथ लिवर-किडनी और आंखों से लेकर तंत्रिकाओं तक का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
Diabetes Risk: इंसुलिन रेजिस्टेंस के शुरुआती संकेत क्या हैं और कब बढ़ जाता है डायबिटीज का खतरा?
इंसुलिन रेजिस्टेंस अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है। पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, परिवार में डायबिटीज और कुछ मेटाबोलिक स्थितियां जोखिम बढ़ाती हैं। प्री-डायबिटीज की पहचान HbA1c, फास्टिंग ग्लूकोज या ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट से होती है। समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार डायबिटीज के जोखिम को घटा सकते हैं।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और इसके खतरे
इंसुलिन का काम खून से ग्लूकोज को मांसपेशियों, फैट और लिवर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करना है। जब ये कोशिकाओं में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती हैं, तो शरीर को ग्लूकोज को नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।
- शुरुआती दौर में अग्न्याशय ज्यादा इंसुलिन बनाकर इस समस्या की भरपाई कर सकता है।
- हालांकि समय के साथ यदि शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, तो ब्लड ग्लूकोज बढ़ने लगता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर में डायबिटीज और इंसुलिन बढ़ने के लक्षणों की अगर समय रहते पहचान हो जाए और इसका इलाज शुरू हो जाए तो खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
इसकी पहचान कैसे करें?
इंसुलिन रेजिस्टेंस की शुरुआत में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता, फिर भी कुछ बदलाव खतरे का संकेत हो सकते हैं।
- पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, कमर का आकार बढ़ना, वजन बढ़ना और शारीरिक गतिविधि का लगातार कम होना महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
- कुछ लोगों में गर्दन या त्वचा की सिलवटों पर गहरे और मोटे पैच दिखाई दे सकते हैं। इसे एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है
कुछ लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और प्री-डायबिटीज की आशंका दूसरों की तुलना में ज्यादा होती है। 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा यदि परिवार में पहले से टाइप-2 डायबिटीज की हिस्ट्री रही है, शारीरिक गतिविधि कम है तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
समय पर जांच से टाल सकते हैं खतरा
डॉक्टर कहते हैं, यदि आपका वजन ज्यादा है, कमर के आसपास चर्बी बढ़ रही है, परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री रही है या शारीरिक गतिविधि कम है तो डॉक्टर से मिलकर ब्लड शुगर और HbA1c की जांच जरूर करा लें।
प्री-डायबिटीज की पहचान होने का मतलब यह नहीं कि डायबिटीज निश्चित रूप से होगी। वजन कंट्रोल करने, नियमित शारीरिक गतिविधि, आहार और नींद में सुधार जैसे बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस और प्री-डायबिटीज के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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