चिकमंगलूर अपने आप में प्राकृतिक नजारों का अनोखा संगम समेटे हुए है। पर्वतीय तलहटी पर स्थित यह शहर चाय और कॉफी के बागानों के लिए भी प्रसिद्ध है। जिन्होंने भी इस खूबसूरत नगर को देखा है वो यहां की खूबसूरती का मुरीद हो गया है। आइए आगे की स्लाइड में जाने इस खूबसूरत शहर के बारे में क्या कहते हैं अभिनेता कार्तिक जयराम।
मुझे कर्नाटक राज्य का शहर चिकमंगलूर बहुत पसंद है। पर्यटकों के लिए यह बेहद खूबसूरत व अच्छी जगह है। चिकमंगलूर को चिक्कमगलुरु के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर अपने आप में प्राकृतिक नजारों का अनोखा संगम समेटे हुए है। यहां चारों तरफ हरियाली है, पहाड़ हैं और झरने बहते नजर आते हैं। कई जगह तो सड़कें बेहद छोटी-छोटी हैं।
पर्यटकों के लिए चिकमंगलूर घूमना अपने आप में अद्भुत नजारा है। यहां के जंगल में घूमना मजेदार अनुभव का अहसास कराता है। बारिश के दिनों में तो यहां का मौसम और भी अच्छा व सुहावना हो जाता है, जबकि गर्मियों के मौसम में यहां का शीतल वातावरण पर्यटकों के मन को मोह लेता है।
पर्यटकों के लिए चिकमंगलूर घूमना अपने आप में अद्भुत नजारा है। यहां के जंगल में घूमना मजेदार अनुभव का अहसास कराता है। बारिश के दिनों में तो यहां का मौसम और भी अच्छा व सुहावना हो जाता है, जबकि गर्मियों के मौसम में यहां का शीतल वातावरण पर्यटकों के मन को मोह लेता है। मेरी कई साउथ फिल्मों की शूटिंग भी यहीं हुई है। जब पहली बार मैं वहां घूमने गया तो वहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखता ही रह गया। उसके बाद वहां आने-जाने का सिलसिला बन गया। वहां पर्यटकों के देखने लायक काफी जगहें हैं, जिनमें मुरुदेश्वर व बाबा बुदगिरी पर्वत क्षेत्र दर्शनीय व खास स्थल हैं।
चिकमंगलूर के पास स्थित मुरुदेश्वर बहुत दर्शनीय स्थल है। वहां समुद्र किनारे महादेव का बहुत बड़ा मंदिर है, जहां महादेव की बहुत ही विशाल मूर्ति स्थापित है, जिसे देखकर ऐसा अनुभव होता है कि साक्षात महादेव ही वहां विराजमान हों। दिन और रात दोनों समय इस मंदिर में घूमने का अनुभव अलग-अलग होता है। रात की जगमगाहट में तो यह जगह और भी खूबसूरत व मनमोहक लगने लगती है। मान्यता है कि इसी जगह पर रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तप व पूजा-अर्चना की थी। यहां के लोग मेले व त्योहार भी खूब धूमधाम के साथ मनाते हैं। मुझे याद है, जब मैं एक बार यहां गया था तो उन दिनों मेला लगा हुआ था। उस दौरान चिकमंगलूर और भी खूबसूरत लग रहा था। उस समय यहां के लोग अंगारों पर चलने का करतब दिखा रहे थे। दशहरा का त्योहार भी यहां के लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं।