नवरात्रि के मौके पर देश के सभी मां दुर्गा के मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। हजारों श्रद्धालु मां के दरबार में अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए हाजिरी लगाते हैं। नवरात्रि के नौ दिन लोग देश के अलग-अलग मान्यताओं वाली मंदिरों में मां का दर्शन करने जाते हैं। इसी सिलसिले में हम आपको बताने जा रहे हैं मां नेतुला मंदिर के बारे में, जहां आम दिनों में भी हजारों भक्तों की लगती है भीड़।
बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के कमुार गांव में मौजूद मां नेतुला मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर के लोगों के बीच अपनी मान्यताओं को लेकर प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। लोग यहां पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए मन्नतें मांगते हैं। साथ ही ऐसा माना जाता है कि अगर लगातार तीस दिन तक मंदिर में सच्चे भक्ति-भाव से धरना देने पर मनवांछित फल की भी प्राप्ति होती है। नेतुला मां के दरबार में अब तक आधे दर्जन से अधिक अंधे व्यक्ति की खोई हुई आंखों की रौशनी व नि:संतान दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति हो चुकी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर गंगा-जमुनी तहजीब को समेट रखा है। इस मंदिर में हिंदूओं के साथ-साथ मुस्लिम संप्रदाय के लोग हाजिरी लगाने आते हैं। फूलों से मां का दरबार सजता है। नेतुला मंदिर में प्रत्येक दिन सुबह-शाम मां का श्रृंगार और आरती की जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार भगवान विष्णु ने जब मां सती के शरीर को खंडित किया था तो उनका पीठ यहीं गिरा था। इस मंदिर में मां के पीठ की पूजा की जाती है।
कैसे पहुंचे
जुमई रेलवे स्टेशन व लखीसरायसे मां नेतुला मंदिर की दूरी करीब तीस किलोमीटर है। वहीं नालंदा से मंदिर की दूरी 60 किलोमीटर है। जमुई से मंदिर जाने के लिए बसें उपलब्ध रहती हैं। आप चाहें तो छोटे वाहनों से भी मंदिर पहुंच सकते हैं।