Biggest Winter Fairs In India: सर्दियों का मौसम भारत में सिर्फ ठंड नहीं लाता। यह मेले और उत्सवों का भी समय है। देश के विभिन्न हिस्सों में दिसंबर-जनवरी के दौरान सांस्कृतिक, पारंपरिक और लोक मेले आयोजित होते हैं, जो यात्रियों और पर्यटकों को लोक कला, संगीत, शिल्प और ऐतिहासिक अनुभवों से जोड़ते हैं। आइए जानें छह ऐसे मेले, उनकी विशेषता, स्थान और 2025-26 में संभावित तारीखें जब आप सैर पर जा सके हैं।
सर्दियों में मौसम ठंडा और सुखद होता है, जिससे मेले का अनुभव और रोमांचक बनता है। ये मेले लोक संस्कृति, शिल्प, नृत्य और संगीत का जीवंत प्रदर्शन करते हैं। नमक के रेगिस्तान, पर्वतीय पर्वत, हथेली बैंड और रंग-बिरंगे लोक पोशाक फोटो के लिए परफेक्ट पलों का खज़ाना है। इन मेलों में ट्रेडिशन और ग्लैमर दोनों ही मिलते हैं, जो सोशल मीडिया ट्रैवल पोस्ट्स के लिए शानदार हैं।
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रण उत्सव
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रण उत्सव, गुजरात
गुजरात के कच्छ में रण उत्सव का आयोजन होता है। इसे भारत का सबसे प्रसिद्ध मेला माना जाता है। विशाल सफेद रेगिस्तान में ऊंट सफारी, कैंपिंग, लोक संगीत नृत्य और हस्तशिल्प प्रदर्शन का आनंद यहां उठाया जा सकता है। रण उत्सव में स्वादिष्ट गुजराती व्यंजन देखने और चखने को मिलते हैं। इस वर्ष रण उत्सव 23 अक्टूबर 2025 आयोजित हुआ है जो कि 4 मार्च 2026 तक जारी रहेगा।
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कोणार्क नृत्य महोत्सव
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कोणार्क डांस फेस्टिवल, ओडिशा
ओडिशा में हर साल आयोजित होने वाला कोणार्क डांस फेस्टिवल इस बार भी लगने वाला है। यह मेला दिसंबर के पहले सप्ताह में लगता है। इस बार कोणार्क डांस फेस्टिवल 1 से 5 दिसंबर 2025 को लग रहा है। ये मेला भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत को करीब से समझने का बेहतरीन मौका देता है। यहां स्थानीय हस्तशिल्प और स्वादिष्ट ओडिया व्यंजन भी देखने-खाने को मिलते हैं।
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माउंट आबू घूमने जा सकते हैं
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विंटर फेस्टिवल, माउंट आबू, राजस्थान
राजस्थान के माउंट आबू में विंटर फेस्टिवल का आयोजन हो रहा है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी विंटर फेस्टिवल 29 से 31 दिसंबर 2025 को आयोजित होगा। मेले में परंपरागत लोक नृत्य, संगीत, आतिशबाज़ी, हेरिटेज शो, झील पैरेड और सांस्कृतिक प्रदर्शन का लुत्फ उठा सकते हैं।
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शिल्पग्राम
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शिल्पग्राम उत्सव, उदयपुर
राजस्थान के उदयपुर में स्थित शिल्पग्राम गांव में उत्सव होता है। यहां ग्रामीण कला और हस्तशिल्प का गाँव-मेला देखने को मिलता है जिसमें लोक कलाकारों की प्रस्तुति, पारंपरिक शिल्प, हस्तकरघा और सांस्कृतिक कार्यशालाएं आयोजित होती हैं। इस वर्ष दिसंबर के अंतिम सप्ताह में मेले का आयोजन हो सकता है।