भारतीय राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने कई बड़े मुकाम हासिल किए और राजनीति में अपना नाम बुलंद किया। ऐसे ही एक नेता हैं तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन। शुक्रवार को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने सबसे पहले ये आदेश दिया कि हर परिवार को कोरोना राहत के रूप में चार हजार रुपये दिए जाएंगे। लेकिन आज भी लोग स्टालिन के बारे में बेहद कम जानते हैं। तो चलिए हम आपको इनके बारे में कुछ खास बाते बताते हैं, और उनकी जिंदगी के हर पल को जानने की कोशिश करते हैं।
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एमके स्टालिन: चुनाव हारे तो बन गए अभिनेता, 14 की उम्र में रखा था राजनीति में कदम और आज हैं मुख्यमंत्री
Sat, 08 May 2021 02:23 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Sat, 08 May 2021 02:23 PM IST
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एमके स्टालिन
- फोटो : पीटीआई
m k stalin
- फोटो : एएनआई
ऐसे पड़ा नाम
- दरअसल, एम स्टालिन का पूरा नाम मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन है, और उनके नाम के पीछे एक जबरदस्त कहानी है। स्टालिन के जन्म के चार दिन बाद सोवियत संघ के कम्युनिस्ट जोसेफ स्टालिन का निधन हुआ था। इसलिए करुणानिधि ने अपने बेटे का नाम स्टालिन रख दिया था।
एम के स्टालिन
- फोटो : सोशल मीडिया
इस वजह से स्कूल में पढ़ती थी मार
- आपको जानकर हैरानी होगी कि स्कूल में शिक्षक स्टालिन की पिटाई सिर्फ इसलिए करते थे, क्योंकि वे करुणानिधि के बेटे थे। उस वक्त तमिलनाडु में हिंदी विरोधी अभियान चरम पर था और हिंदी के खिलाफ करुणानिधि ने अभियान चला रखे थे।
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एमके स्टालिन (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
छोटी उम्र से राजनीतिक सफर शुरू
- महज 14 साल की उम्र में ही स्टालिन ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वो साइकिल से चाचा मुरासोली मारन का प्रचार किया करते थे। वहीं साल 1984 में वो अपना पहला विधानसभा चुनाव हारे, लेकिन साल 1989 में उतनी ही ताकत से उन्होंने जीत दर्ज की। हालांकि, राजीव गांधी की हत्या के बाद साल 1991 में स्टालिन हार गए।
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एमके स्टालिन
- फोटो : Facebook
साल 1996 में वे चेन्नई के पहले सीधे निर्वाचित मेयर बने। इस दौरान उन्होंने ब्यूटिफुल चेन्नई प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी और जब इसकी लोकप्रियता बढ़ी तो उन्हें मानगर थानथाई यानी फादर ऑफ सिटी कहा जाने लगा।