प्रज्ञा तिवारी
Toxic Friendship: दोस्ती में जहर की तरह होती हैं ये बातें, संकेत पहचानकर संभाल लें रिश्ता
टॉक्सिक दोस्ती की पहचान
हल क्या है
किसी भी चीज की अति से बचें, फिर चाहे वह प्यार हो, केयर हो या नाराजगी। ऐसी दोस्ती दमघोंटू होती है। इनमें से किसी की भी अति हो तो समझ जाएं कि रिश्ता खत्म होने को है। ऐसे में धीरे-धीरे पीछे हटें। दोस्ती खत्म करने में थोड़ी समझदारी दिखाएं। लड़ाई-झगड़ा करके रिश्ता खत्म करने से अच्छा है कि धीरे-धीरे अपने कदम पीछे खींच लें। सामने वाला भी आपके रूखे व्यवहार को समझ जाएगा और आपकी मानसिक शांति भी बनी रहेगी। इसके साथ ही दृढ़ बनें।
अगर आप टॉक्सिक दोस्ती से बाहर निकलना चाह रही हैं तो दिल को थोड़ा मजबूत रखना होगा, क्योंकि हो सकता है कि सामने वाले को एक बार माफ करके आप सब सामान्य करने की कोशिश करें, लेकिन जब यह बार-बार हो तो फिर आप ऐसे में खुद को कंट्रोल करें। संपर्क के सारे रास्ते खुद ही बंद करें।
अगर समस्या ज्यादा बढ़ गई हो तो परिवार वालों की मदद लें। अगर आपका दोस्त आपको धोखा दे रहा हो और नजरअंदाज कर रहा हो तो समझ जाएं कि दोस्ती सिर्फ नाम की बची है। ऐसे रिश्ते को बेवजह ढोने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपको भावनात्मक रूप से कमजोर करेगा।
इसके अलावा कई बार गलतफहमियों या छोटी-मोटी भूल की वजह से भी दोस्ती में दरार पड़ जाती है। दोस्ती में एक-दूसरे पर भरोसा करना आना चाहिए। खुद भी इस काबिल बनें कि आप पर भरोसा किया जा सके, ताकि किसी तीसरे के लिए जगह न बचे। गलतफहमियों से दूरी बनाए रखें।
गुण के साथ कमी भी स्वीकारें
बरेली कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुविधा शर्मा कहती हैं, दोस्ती में एक-दूसरे के प्रति स्वीकार्यता का भाव होना चाहिए। गुण के साथ कमियों को भी स्वीकारें, क्योंकि संपूर्ण कोई भी नहीं है। दोस्ती टॉक्सिक होने लगे तो पॉजिटिव एटीट्यूड के साथ आपस में बात करें। संवादहीनता न आने दें। छोटी-छोटी बातों को अनदेखा करना सीखेंगी तो दोस्ती लंबी चलेगी। दोस्त से अपेक्षा कम रखें और मालिकाना हक न जताएं। उसके निर्णयों के प्रति सम्मान रखें। एक-दूसरे के पर्सनल स्पेस में बिल्कुल न जाएं। इसके बावजूद रिश्ता टॉक्सिन होने लगे तो बिना आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तुरंत पीछे हट जाएं।