पति-पत्नी के बीच मनमुटाव होना आम बात है। बात जब जीवन भर साथ रहने की होती है तो दो इंसानों के बीच विचारों का न मिलना या फिर किसी बात का बुरा लग जाना बिल्कुल ही सामान्य बात है। बातें तो तब बिगड़ती है जब आप उन शिकायतों का गुबार मन में दबा कर बैठे रहते हैं। और किसी पल गुस्से में वो सारी शिकायतें एक साथ कह बैठते हैं। जिससे पति-पत्नी के मन में एक गांठ बन जाती है। जरूरत है कि किसी भी तरह की शिकायत जैसे कि पति आपको पर्याप्त समय नहीं देता है या फिर कोई भी बात उस बारे में बैठ कर आराम से एक दूसरे से कह लिए जाएं। तो आइए जाने कि अगर आपके मन में इस तरह की कोई शिकायत है तो उससे कैसे निपटें।
खुशहाल रहने के लिए पार्टनर के साथ इन मुद्दों पर बात करना भी है जरूरी
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मन में किसी तरह की बात बुरी लग रही है तो उसे मन से निकाल देने में ही भलाई है। अगर आपको इस बारे में असमंजस लग रहा है तो इससे बाहर निकलिए। अगर बातें मन में ही रह जाएंगी तो कभी गुस्से में निकलेंगी और आप ये अच्छी तरह से समझती हैं कि गुस्से में की हुई बात हमेशा संबंधों को खराब करती है। इसलिए जब शांत मन हो तभी बातों को कहें और शुरू करते ही ताने मारना मत शुरू करें।
जीवनसाथी के साथ बात करना शुरू करें तो बिल्कुल साफ-सुथरी बातें करें। गोल-गोल घुमा कर बातें करना किसी को पसंद नहीं होता है। उनसे कहें कि आपको कौन सी बात पसंद नहीं आ रही है। सामने वाले को समझ में आना चाहिए कि उसकी कौन सी बात से आपको तकलीफ हुई है और वो अपने व्यवहार में सुधार कर सके।
सामने वाला आपके मन की बातों को नहीं पढ़ सकता है ।आपको उसे अभिव्यक्त करना पड़ेगा। अगर आप चाहती हैं कि पति कुछ समय आपके साथ बैठे बात करें तो ये आपको कहना पड़ेगा, तभी वो समझेंगे।
बात जब शुरू हो जाए तो उसे पूरी जरूर करें। बीच में ही न छोड़े। उनसे पूछें कि समस्या कहां है। क्या उनके इस व्यवहार के पीछे आपकी कोई गलत बात तो जिम्मेदार नहीं है क्योंकि हर बार गलती पार्टनर की हो ये जरूरी तो नहीं।