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Siblings Bond: भाई-बहन के बीच हमेशा बना रहेगा स्नेह, मजबूत रिश्ते के लिए रखें इन बातों का ध्यान

Wed, 29 May 2024 10:32 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 29 May 2024 10:32 AM IST
सार

बचपन में भाई-बहन के बीच प्यार बना रहता है। वहीं दोनों में जितना प्रेम होता है, उतने ही झगड़े भी होते हैं। बात-बात में मजाक उड़ाना और शिकायतें करना तो आम बात है लेकिन ज्यादातर भाई-बहनों में आपसी स्नेह उनकी शादियों से पहले तक ही होता है।

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Siblings Bond Know How To have a good brother-sister relationship
भाई बहन के बीच रिश्ता - फोटो : istock

सोनम लववंशी



भाई-बहन के बीच का रिश्ता प्यार की मजबूत डोर से बंधा होता है। एक साथ बड़े होना, परेशानियों में पड़ना, साथ में निपटना, एक-दूसरे की शरारतों में साथ देना, पढ़ाई-लिखाई करना और हर मुश्किल में एक-दूसरे के लिए खड़े रहना ही तो इस रिश्ते की नींव है। लेकिन अक्सर इस प्यार भरे रिश्ते में शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बाद दूरियां बढ़ने के साथ ही तकरार होने लगती है। शादी के बाद लड़की के जीवन में नए रिश्ते जुड़ते हैं। उन रिश्तों को जानने और निभाने में भाई-बहन के रिश्ते में दूरी आ जाती है। कई बार परिवार की विचारधारा भी रिश्तों में दूरियां बढ़ा देती है। कभी-कभी परिवार का पक्ष लेने या उन्हें सही ठहराने की वजह से भी दोनों के बीच तनाव बढ़ जाता है। दरअसल, यह तकरार कभी स्थायी नहीं होती। रिश्तों की मजबूती के लिए दोनों पक्षों को अपनी-अपनी तरफ से समझदारी दिखानी चाहिए।

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सामंजस्य जरूरी - फोटो : Amar Ujala (File)

सामंजस्य जरूरी

कोई भी परिवार तब पूरा माना जाता है, जब उसमें माता-पिता के अलावा भाई-बहन भी हों। बचपन की मौज-मस्ती के लिए हमउम्र भाई-बहन का होना बहुत जरूरी है। बचपन में भाई-बहन के बीच प्यार बना रहता है। वहीं दोनों में जितना प्रेम होता है, उतने ही झगड़े भी होते हैं। बात-बात में मजाक उड़ाना और शिकायतें करना तो आम बात है। लेकिन ज्यादातर भाई-बहनों में आपसी स्नेह उनकी शादियों से पहले तक ही होता है। उसके बाद किसी न किसी बात पर बात बिगड़ ही जाती है। वहीं, मजाक में कही गई बात भी दिल पर लग जाती है। ऐसे में रिश्तों में प्यार और सही तालमेल बनाए रखने के लिए दोनों को कोशिशें करते रहना चाहिए।

भाभी का अहम रोल

सामान्यतः घरों में बहन की शादी के बाद जीजा जी से नया रिश्ता जुड़ता है, तो भाई की शादी के बाद भाभी से। भाई का सीधा संबंध जीजा जी से बहुत नजदीकी का नहीं होता। इसलिए इन दोनों के बीच शायद ही कभी तनाव के हालात बनते हों। लेकिन भाई की शादी के बाद भाभी के घर आने पर ननद से रिश्ता बहुत मायने रखता है। असल में, भाभी जब नए घर में आती है तो उसके सबसे ज्यादा नजदीक ननद ही होती है, फिर चाहे वह छोटी हो या बड़ी।

यह संबंध बेहद नाजुक होता है, इसलिए इसे प्यार और अपनेपन से संभालना जरूरी है। भाई और बहन के रिश्ते में तकरार होने से रोकने में भाभी अहम भूमिका निभाती है। वहीं, सास के बाद भाभी ही ननद की ससुराल में मां का फर्ज निभाती है। बहन की ससुराल में किसी संकट की स्थिति में भाई-भाभी की भूमिका कैसी रही, इस पर उसके पीहर का सम्मान भी निर्भर करता है।

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संवादहीनता न हो - फोटो : iStock

संवादहीनता न हो

देखा गया है कि भाई या बहन की शादी के बाद जो नए रिश्ते बनते हैं, उनमें सबसे ज्यादा कमजोर पड़ता है भाई-बहन का रिश्ता। इसे सरसरी तौर पर स्वीकार न किया जाए, पर इस सच को नकारा नहीं जा सकता। बचपन से ही लंबा साथ रहने के बाद भी यह रिश्ता शादी के बाद सगे-संबंधियों जैसा होकर रह जाता है। रक्षाबंधन और अन्य पर्व पर ही इस रिश्ते की अहमियत को याद किया जाता है और यह बहनों के पीहर आने का एक बहाना भी होता है।

कई बार भाई-बहनों के बीच खिंचाव जैसे हालात बनने का कारण यह भी होता है कि किसी भी मामले में दोनों एक-दूसरे से कुछ ज्यादा ही उम्मीद कर बैठते हैं। जब वह पूरी नहीं होती तो संबंध बिगड़ते हैं। इसलिए जरूरी है कि भाई-बहन के बीच कभी भी संवादहीनता की स्थिति न बने। दोनों बचपन की तरह आपस में खुलकर बात करें और हर उस मामले में अपना पक्ष रखें, जो भविष्य में कभी तनाव का कारण बन सकता है।

तोहफे देकर बढ़ाएं प्यार

उपहार किसे पसंद नहीं आते। जब भी कभी मौका मिले, एक-दूसरे को उसका पसंदीदा उपहार जरूर दें। उपहार का चुनाव करते समय यह जरूर ध्यान रखें कि चीज ऐसी हो, जो कि काम भी आ सके। भाई-बहन का रिश्ता जीवन भर हरा-भरा रहे और उसमें खुशियों के फूल खिलें, इसके लिए दोनों को ही अपनी-अपनी तरफ से सकारात्मक प्रयास करते रहने चाहिए। किसी एक के झुकने से बात नहीं बनेगी। एक बहन के लिए माता-पिता के बाद भाई और भाभी का घर ही उसका पीहर होता है। यदि पीहर के दरवाजों को खुला रखना हो तो वहां रिश्तों की दस्तक की आवाज हमेशा आती रहनी चाहिए।

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बहन की ससुराल का मान - फोटो : istock

संतुलन की जरूरत

परिवार की नई सदस्य भाभी को लगता है कि अब यह घर मेरा है, मुझे ही इसे संवारना है, जबकि ननद को महसूस होता है कि अब तक जो उसका है, उसमें अब भाभी की हिस्सेदारी हो गई। कई बार जब भाभी और ननद में किसी मुद्दे पर खींचतान होती है तो भाई बेहद असमंजस में पड़ जाता है कि वह किसका साथ दे! बहन का, जो बचपन से उसके साथ रही या पत्नी का, जो जीवन भर उसके साथ रहेगी! बस इसी जगह भाई-बहन के बीच तकरार बढ़ जाती है।

इसलिए एक बहन या भाभी होने के नाते कोशिश करें कि उनको कभी भी ऐसी किसी स्थिति में न डालें। आप किसी भी तकरार को बात करके एवं समझाकर मुद्दा सुलझा लें और अपने स्नेह भरे रिश्ते को हमेशा के लिए संभाल लें। मगर यदि भाई की दखलंदाजी से तनाव बढ़ता है तो स्थिति बिगड़ने और परिवार की शांति भंग होने में देर नहीं लगती। इसलिए भाई के लिए जरूरी है कि वह किसी एक की तरफ झुकने के बजाय दोनों पलड़ों को बराबरी पर रखे और स्वयं की भूमिका निष्पक्षता से निभाए।

बहन की ससुराल का मान

जब बहन की शादी होती है, तब एक भाई को बहन के ससुराल पक्ष को मान देना जरूरी होता है। ऐसे में बहन का उसके ससुराल में सम्मान बना रहता है। वहीं, समय-समय पर बहन से बातें करते रहना भी जरूरी है। इससे जीजा जी को भी महसूस होगा कि उसकी पत्नी का भाई उसके साथ हमेशा खड़ा है। इसके साथ ही आप भी सभी रिश्तों को अच्छी तरह से निभाने की कोशिशें करती रहें।

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दोनों के प्रयास हैं खास - फोटो : Istock

दोनों के प्रयास हैं खास

रिलेशनशिप काउंसलर डॉ. शिवानी मिसरी साधू कहती हैं, बचपन में भाई-बहनों के बीच प्यार का गहरा बंधन होता है, जो साझा अनुभवों और एक साथ बिताए समय के माध्यम से विकसित होता है। शादी के बाद जैसे ही वे अपना-अपना परिवार शुरू करते हैं तो वे अपने रिश्ते को समय नहीं दे पाते। लेकिन आप दोनों के ही प्रयास इस दूरी को खत्म कर सकते हैं।

भाई-बहन के बीच दूरियां कम करने के लिए निरंतर संचार बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यह कॉल, मैसेज या वीडियो चैट के माध्यम से हो सकता है। विशेष अवसरों को एक साथ मनाना, साझा पलों को याद करना और कठिन समय के दौरान एक-दूसरे के लिए मौजूद रहना भी इस बंधन को मजबूत कर सकता है। दूरी आपके प्यार को कम करे, यह जरूरी नहीं। रिश्ते को बनाए रखने के लिए किया गया प्रयास असल में मायने रखता है।

एक-दूसरे के दृष्टिकोण को सहानुभूति के साथ सुनने से आपसी समझ विकसित होती है। ध्यान रखें, कभी-कभी असहमत होने पर भी सहमत होना ठीक है। परिवार के किसी सदस्य या पेशेवर मध्यस्थ जैसे किसी तटस्थ तीसरे पक्ष से मदद मांगना भी फायदेमंद हो सकता है। आखिर आपका लक्ष्य विवाद को सुलझाते हुए रिश्ते को सुरक्षित रखना है।

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