शादी जीवन का एक अहम फैसला होता है। हर लड़का चाहता है कि उसे पत्नी के रूप में बेहतर जीवनसाथी मिले, जो उसकी और उसके घर की जिम्मेदारी संभाल सके। वहीं हर लड़की चाहती है कि उसे ऐसा पति मिले, जो उसे बेहद प्यार करे और उसका हर तरह से ख्याल रख सके। आजकल शादी का सक्सेस रेट कम हुआ है यानी कि कई बार साझा समझ(म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग) नहीं होने की वजह शादी के अगले दिन से ही रिश्ते में कड़वाहट आने लगती है। ऐसे में जरूरत महसूस होती है कपल काउंसिलिंग की:
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दरअसल, शादी जैसे रिश्ते में कई बार दिक्कत यह होती है कि पति और पत्नी, दोनों ही अपनी-अपनी जगह पर सही होते हैं। बस वे एक-दूसरे का नजरिया नहीं समझ पाते हैं। ऐसे में तालमेल नहीं बैठ पाता और रिश्ते में खींचातानी शुरू हो जाती है। दोनों को समझ ही नहीं आता कि आखिरकार उनके रिश्ते में खिंचाव की समस्या कहां पर है और उसे कैसे दूर किया जाए।
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आज के समय में तलाक के मामले भी बढ़ रहे हैं। इसलिए रिश्ते में ठहराव बना रहे और रिश्ता आजीवन निभाया जा सके, इसके लिए ज्यादा समझदारी भरे कदमों की जरूरत होती है और ऐसा ही एक कदम है- कपल काउंसिलिंग। अक्सर देखा जाता है कि पति-पत्नी में अनबन शुरू होने के बाद वे काउंसिलिंग का रुख करते हैं। लेकिन शादी से पहले काउंसिलिंग करना आपके रिश्ते के लिए कहीं ज्यादा अच्छा है।
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तलाक के कई मामलों में आपने देखा, सुना या पढ़ा भी होगा कि कोर्ट में कड़े निर्णय से पहले पति-पत्नी को काउंसिलिंग की सलाह दी जाती है। शादी के बाद इस तरह की स्थितियां न बनें, इसके लिए शादी से पहले ही काउंसिलिंग करनी चाहिए। आमतौर पर देखा जाता है कि कपल के बीच बेहतर कम्युनिकेशन नहीं होने के कारण उनके बीच गलतफहमियां पैदा होती है।
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शादी से पहले काउंसिलिंग पति-पत्नी को एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझकर बातचीत के पुल को मजबूत बनाता है। ऐसे में शादी के बाद भी दोनों ही पार्टनर अपने जीवनसाथी के सामने आसानी से अपनी बात रख पाते हैं।