बच्चों की सारे बातें मानना बेहद मुश्किल होता है। अगर आप उनकी किसी बात के लिए मना करते हैं तो बच्चे गुस्सा हो जाते हैं। ऐसे में आपको भी दुख होता होगा कि आपने उनका दिल दुखा दिया। दरअसल, अभिभावक बनना तो आसान है लेकिन इस जिम्मेदारी को निभाना काफी कठीन है। ऊपर से जब आपकी पूरी लाइफस्टाइल ही भागदौड़ भरी हो और आपके पास बच्चों के लिए वक्त कम रहता हो, ऐसे में बच्चों की नजर में अच्छा अभिभावक बनने के लिए आपको बहुत कुछ करना पड़ता है। आपको अपने बच्चों के लिए व्यस्त पलों में भी क्वालिटी वक्त नहीं निकालना होता है जो कि बेहद जरूरी भी है।
अगर आप अपने बच्चों के लिए क्वालिटी टाइम नहीं निकालेंगे तो इससे उनकी परवरिश पर असर पड़ेगा। बच्चे आपसे दूर होते जाएंगे और इसका उनके जेहन पर भी नकारात्मक मानसिक असर पड़ेगा। यह स्थिति तब और ज्यादा मुश्किल हो जाती है जब घर में मां-बाप दोनों ही वर्किंग हों। ऐसे में बच्चों की कई ख्वाहिशें कई बार पूरी नहीं हो पाती हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि आप घर और ऑफिस के बीच सामंजस्य स्थापित करके बच्चों को खुश नहीं रख सकते। अगर आप पेरेंटिंग कौशल में माहिर हैं तो आप अपने खुशहाल संसार को और ज्यादा खुशहाल बना सकते हैं।
ऑफिस से घर जाते वक्त आप हमेशा इस बात पर गौर करें कि क्या आप अपने बच्चों के साथ सकारात्मक इंट्रेक्शन रखते हैं? उनसे बातचीत करते वक्त कोई नकारात्मक बात तो नहीं बोलते? अगर आप ऐसा करते हैं तो फौरन इस आदत में सुधार लाएं और बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा इंट्रेक्शन रखें और खूब वक्त बिताएं, इससे आपके और आपके बच्चों के बीच भावनात्मक लगाव बढ़ेगा। बच्चों के साथ वक्त बिताने का सबसे अच्छा तरीका है, उनके साथ जमकर खेल-कूद करना।
4 of 4
बच्चे और अभिभावक
- फोटो : pixabay
इस बात का ध्यान रखें कि हमेशा बच्चों के सभी प्रश्नों का जवाब धैर्यपूर्वक दें। झुंझलाहट न दिखाएं। अपने बच्चों को हर चीज प्यार से समझाएं। इससे आपके और बच्चों के बीच का रिश्ता और मजबूत होगा और आप अच्छे अभिभावक भी कहलाएंगे। हां यहां ध्यान रखें कि बच्चों के सवालों के जवाब ही नहीं दें बल्कि उनके जवाब भी सुने।