मेखला गुप्ता
सालों बाद अनीता की मां गांव से आई थीं। बच्चे नानी को देख बहुत खुश थे, लेकिन जैसे ही वान्या नानी की गोद में बैठी, शोभित ने उसके बाल खींच लिए। वान्या रोने लगी, लेकिन फिर भी शोभित नहीं रुका। दोनों बच्चों की शरारतें देख अनीता बोली, “मां, मैं इनसे तंग आ गई हूं। शोभित रोज वान्या को मारता है। कितना भी समझा लूं, कोई सुधार नहीं।” बेटी की बात सुनकर मां बोलीं, “बेटी, पहले तुम्हें खुद शोभित को समझना होगा और फिर उसे समझाना होगा, तभी परेशानी का हल निकलेगा।”
समझ की कमी
कई बार मांएं बच्चों को गलती करने पर मार देती हैं। पिता भी गुस्से में डांट देते हैं। छोटे बच्चे में समझ की कमी होती है। उसे लगता है कि गुस्सा, निराशा और असंतोष को व्यक्त करने का यही तरीका है, इसलिए वह अपनी भावनाओं को शब्दों के बजाय शारीरिक रूप से व्यक्त करने के लिए झगड़ा और मारपीट का सहारा लेता है। ऐसे में आप उसके व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए उससे खुला संवाद करें।
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ध्यान आकर्षित करना
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ध्यान आकर्षित करना
बच्चे अपने माता-पिता का ध्यान आकर्षित करने के लिए भी भाई-बहनों या दोस्तों से लड़ाई करते हैं। यह विशेष रूप से तब होता है, जब वे महसूस करते हैं कि उन्हें बराबरी का प्यार और समय नहीं मिल रहा। यह भावना उन्हें असुरक्षित तथा उपेक्षित महसूस कराती है और वे उग्र हो जाते हैं। इसलिए दोनों बच्चों पर समान रूप से ध्यान दें। अगर आपका दूसरा बच्चा काफी छोटा है तो कोशिश करें कि उसे सुलाने के बाद बड़े को थोड़ा समय दें।
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अत्यधिक छूट
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अत्यधिक छूट
कई बार माता-पिता को आस-पास न पाकर बच्चा छोटे भाई या बहन को मार देता है। आप इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देतीं, जिस कारण वह ऐसा लगातार करता है। असल में, माता-पिता की लापरवाही या अत्यधिक छूट बच्चे को उग्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए ऐसा होने पर बच्चे को तुरंत रोक दें।
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प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या
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प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या
बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या की भावना अक्सर माता-पिता ही बढ़ाते हैं। वे बच्चों की आपस में तुलना करने लगते हैं, जिस कारण भाई-बहन के बीच का प्यार तो खत्म होता ही है, वे अधिकतर समय लड़ने-झगड़ने में बिताते हैं। लेकिन इसका उनके भविष्य पर नकारात्मक रूप से असर पड़ता है। इसलिए आप कोशिश करें कि दोनों बच्चों की तुलना न करें और उनके बीच प्यार तथा समझ बढ़ाने की कोशिश करें।
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डिजिटल माध्यम
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डिजिटल माध्यम
अगर आपका बच्चा जरूरत से ज्यादा हिंसक वीडियो गेम, कार्टून या फिल्में देखता है तो ये उस पर नकारात्मक असर डालते हैं। ऐसे कंटेंट को देखकर बच्चे हिंसा को सामान्य मानने लगते हैं। इसके अलावा यदि घर का माहौल तनावपूर्ण और आक्रामक हो, तब भी वे झगड़ालू हो जाते हैं। इसलिए घर में सकारात्मक माहौल बनाएं और उन्हें हिंसक कंटेंट से दूर रखें।