मेरी तरह ही ज्यादातर लड़कियां प्यार में हिंसा और जबरदस्ती की शिकार होती हैं। विरोध करने की जगह चुप्पी साध लेती हैं। बॉयफ्रेंड की जबरदस्ती को नियति मान बैठती हैं। रिलेशनशिप के शुरुआती दो साल मैंने भी वह सबकुछ झेला, सहन किया जो ज्यादातर लड़कियां करती हैं।दरअसल, मैं उसे खुद से भी ज्यादा प्यार करती थी औ यही वजह थी कि उसकी हिंसक प्रवृत्ति भी मेरी आंखें नहीं खोल पा रही थी।
शारीरिक संबंध के लिए वह जबरदस्ती करता था, एक दिन मैंने यह कदम उठाया
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हमारे रिश्ते की शुरुआत चंडीगढ़ से हुई। पढ़ाई के दौरान वो मुझे मिला। मिला क्या दरअसल वो मेरा सीनियर था और एक साल के भीतर ही हम रिलेशनशिप में आ गए। खूब बातें होने लगी। मैं जब भी बीमार पड़ती सबसे ज्यादा परवाह वो ही करता। मुझे डॉक्टर के पास ले जाने से लेकर दवाई लाने और छोटी-छोटी बातों पर हालचाल जानने तक, ऐसा लगता कि दुनिया में मेरे सिवाय उसके लिए कोई दूसरी चीज मायने ही नहीं रखती है।
मैं अपनी सहेली के साथ हॉस्टल में रह रही थी और वो दोनों एक ही जगह के थे। पता नहीं कब मेरी सहेली उसकी बहन बन गई और (हंसते हुए) उसने हर बात पर उसकी इतनी तारीफ की कि मेरी आंखों पर पट्टी बंध गई। रूम में जब भी कोई बात होती बिना राकेश (काल्पनिक नाम) के बात की शुरुआत ही नहीं होती थी। हर बात के केंद्र में वो ही रहता। उससे ही बातें शुरू होती और उस पर ही खत्म होती।
पता ही नहीं चला कि मेरे मन के भीतर वह एक नायक की भूमिका में कब बस गया? बाकी लड़कों से एकदम अलग लगने लगा। मैं अपनी हर छोटी-छोटी बातें शेयर करने लगी। एक दिन भी बात नहीं होती तो मेरे भीतर निराशा का भाव जागने लगता। अंदर से न जाने कैसी बिजली कौंध उठती कि मैं आतुर हो उठती बात करने और मिलने के लिए।
खैर, यादें काफी लंबी हैं। साल 2013 था हम रांझणा फिल्म देखकर लौट रहे थे। कोमल (बदला नाम) भी साथ थी। हम हॉस्टल न जाकर सीधे उसके कमरे पर चले गए। यह कोमल का ही प्लान था और मुझे भी कोई आपत्ति नहीं थी। खाना बाहर से ही पैक कराकर लाए थे।
ड्रिंक, खूब बातचीत और खाना खाने के बाद कोमल दूसरे कमरे में सोने चली गई। अब मैं और वो ही साथ थे। मैं उसकी बाहों में न जाने कितने सपने देखने लगी? वो कुछ और ही चाहता था और मैं तैयार नहीं थी। मैंने ऐसा कुछ सोचा भी नहीं था। इसलिए.. जब उसकी छेड़खानी बढ़ने लगी तो मैं एकदम से गुस्सा हो गई और कोमल के साथ दूसरे रूम में जाने लगी। उसको यह बात इतनी नागवार गुजरी की वो झटके से बौखला गया। उसने मेरे पूरे शरीर को झकझोरते हुए मुझे वापस खींच लिया और जोरों से एक चाटा जड़ दिया।
मैं अंदर से टूट गई थी और उसे बस अपनी भूख मिटानी थी। मेरे आंसू, बेसुध पड़ा शरीर और सिसकियां उसे किसी चीज से मतलब नहीं था। उस रात तीन बजे तक मैं रोती रही और उसने एक बार भी मुझे नहीं मनाया। उल्टा वो बिस्तर पर सो रहा था।