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शारीरिक संबंध के लिए वह जबरदस्ती करता था, एक दिन मैंने यह कदम उठाया

Wed, 13 Nov 2019 12:56 PM IST
सारंग उपाध्याय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: सारंग उपाध्याय Updated Wed, 13 Nov 2019 12:56 PM IST
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One day he used to force me to have a physical relationship.
प्यार में धोखे की कहानी - फोटो : pixabay

मेरी तरह ही ज्यादातर लड़कियां प्यार में हिंसा और जबरदस्ती की शिकार होती हैं। विरोध करने की जगह चुप्पी साध लेती हैं। बॉयफ्रेंड की जबरदस्ती को नियति मान बैठती हैं। रिलेशनशिप के शुरुआती दो साल मैंने भी वह सबकुछ झेला, सहन किया जो ज्यादातर लड़कियां करती हैं।दरअसल, मैं उसे खुद से भी ज्यादा प्यार करती थी औ यही वजह थी कि उसकी हिंसक प्रवृत्ति भी मेरी आंखें नहीं खोल पा रही थी।



बात-बात पर उसका गुस्सा हो जाना, एकदम से हाथ उठा देना और जबरदस्ती, शारीरिक संबंध बनाना व मेरे गुस्सा होने पर हर चीज का सरलीकरण कर देना। मैं यह सब झेल रही थी, क्योंकि मुझे लगता था धीरे-धीरे वह सुधर जाएगा और शादी के बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन यह मेरी भूल थी और अपने ऊपर होने वाली ज्यादती के लिए मैं खुद जिम्मेदार थी।

 

One day he used to force me to have a physical relationship.
प्यार में धोखे की कहानी - फोटो : pixabay

हमारे रिश्ते की शुरुआत चंडीगढ़ से हुई। पढ़ाई के दौरान वो मुझे मिला। मिला क्या दरअसल वो मेरा सीनियर था और एक साल के भीतर ही हम रिलेशनशिप में आ गए। खूब बातें होने लगी। मैं जब भी बीमार पड़ती सबसे ज्यादा परवाह वो ही करता। मुझे डॉक्टर के पास ले जाने से लेकर दवाई लाने और छोटी-छोटी बातों पर हालचाल जानने तक, ऐसा लगता कि दुनिया में मेरे सिवाय उसके लिए कोई दूसरी चीज मायने ही नहीं रखती है।

One day he used to force me to have a physical relationship.
domestic violence

मैं अपनी सहेली के साथ हॉस्टल में रह रही थी और वो दोनों एक ही जगह के थे। पता नहीं कब मेरी सहेली उसकी बहन बन गई और (हंसते हुए) उसने हर बात पर उसकी इतनी तारीफ की कि मेरी आंखों पर पट्टी बंध गई। रूम में जब भी कोई बात होती बिना राकेश (काल्पनिक नाम) के बात की शुरुआत ही नहीं होती थी। हर बात के केंद्र में वो ही रहता। उससे ही बातें शुरू होती और उस पर ही खत्म होती।

पता ही नहीं चला कि मेरे मन के भीतर वह एक नायक की भूमिका में कब बस गया? बाकी लड़कों से एकदम अलग लगने लगा। मैं अपनी हर छोटी-छोटी बातें शेयर करने लगी। एक दिन भी बात नहीं होती तो मेरे भीतर निराशा का भाव जागने लगता। अंदर से न जाने कैसी बिजली कौंध उठती कि मैं आतुर हो उठती बात करने और मिलने के लिए।

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One day he used to force me to have a physical relationship.
घरेलू हिंसा - फोटो : pixabay
इस तरह मैं उसके साथ घंटों बिताने लगी। पता ही नहीं चला कब कॉलेज में उसका आखिरी साल आ गया। अभी आपके सामने उसकी बात कर रही हूं तो एक क्रूर गुंडे की तरह उसका चेहरा मेरे आंखों के आगे उभर आ रहा है जबकि उस वक्त ये ही वही चेहरा था जो मुझे बाकी सभी चेहरों से एकदम अलग और मासूम लगता था।

खैर, यादें काफी लंबी हैं। साल 2013 था हम रांझणा फिल्म देखकर लौट रहे थे। कोमल (बदला नाम) भी साथ थी। हम हॉस्टल न जाकर सीधे उसके कमरे पर चले गए। यह कोमल का ही प्लान था और मुझे भी कोई आपत्ति नहीं थी। खाना बाहर से ही पैक कराकर लाए थे।

ड्रिंक, खूब बातचीत और खाना खाने के बाद कोमल दूसरे कमरे में सोने चली गई। अब मैं और वो ही साथ थे। मैं उसकी बाहों में न जाने कितने सपने देखने लगी? वो कुछ और ही चाहता था और मैं तैयार नहीं थी। मैंने ऐसा कुछ सोचा भी नहीं था। इसलिए.. जब उसकी छेड़खानी बढ़ने लगी तो मैं एकदम से गुस्सा हो गई और कोमल के साथ दूसरे रूम में जाने लगी। उसको यह बात इतनी नागवार गुजरी की वो झटके से बौखला गया। उसने मेरे पूरे शरीर को झकझोरते हुए मुझे वापस खींच लिया और जोरों से एक चाटा जड़ दिया।


 
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One day he used to force me to have a physical relationship.
प्रतीकात्मक तस्वीर
आंखों से बस आंसू ही बहते रहे। कुछ समझ में नहीं आया। दिमाग सन्न रह गया था। बिस्तर पर वो मेरे शरीर को नोंच रहा था और मैं बेजान और बेसुध पड़ी थी। एक मन होता जोर से चिल्लाऊं, खूब रोऊं और कोई भारी चीज उसके सिर में मारकर कोमल के पास चली जाऊं।

मैं अंदर से टूट गई थी और उसे बस अपनी भूख मिटानी थी। मेरे आंसू, बेसुध पड़ा शरीर और सिसकियां उसे किसी चीज से मतलब नहीं था। उस रात तीन बजे तक मैं रोती रही और उसने एक बार भी मुझे नहीं मनाया। उल्टा वो बिस्तर पर सो रहा था।

 
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