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Passanger Parenting: जब अभिभावक नहीं लेते बच्चों के हर फैसले? जानिए परवरिश के इस नए ट्रेंड के फायदे
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Tue, 29 Jul 2025 03:40 PM IST
सार
Passanger Parenting Benefits: नए माता-पिता के लिए अपने सपनों के साथ बच्चे की परवरिश करना आसान नहीं होता। ऐसे में नए माता-पिता पैसेंजर पेरेंटिंग का सहारा ले सकते हैं।
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पैसेंजर पेरेंटिंग
- फोटो : Adobe stock
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सोनाली अपनी दोस्त सोनिया से मिलने उसके घर आई तो उसने देखा कि सोनिया का बेटा रोनित, जो केवल 10 साल का है, अपने सारे काम खुद कर रहा था। उसने अपनी मम्मी से बिना कोई सलाह-मशवरा किए ऑनलाइन सारा सामान ऑर्डर किया और सोनाली को अच्छी तरह सर्व भी किया। सोनाली को रोनित का व्यवहार बहुत पसंद आया। सोनिया ने उसे बताया कि हम रोनित को ‘पैसेंजर पेरेंटिंग’ के सहारे पाल रहे हैं।
क्या है पैसेंजर पेरेंटिंग
यह एक ऐसी शैली है, जिसमें माता-पिता बच्चे के जीवन में बहुत कम दखल देते हैं। इसमें वे बच्चे के निर्णयों और गतिविधियों को पूरी स्वतंत्रता देते हैं। जैसे एक यात्री बस में केवल बैठा होता है, लेकिन दिशा नहीं तय करता, वैसे ही माता-पिता जीवन रूपी गाड़ी में साथ तो होते हैं, लेकिन ड्राइविंग की जिम्मेदारी बच्चे को सौंपते हैं, यानी कि वे उसे निर्णय लेने, अपने अनुभवों से सीखने और जीवन को अपने नजरिए से देखने की स्वतंत्रता देना सिखाते हैं।
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नए माता-पिता को पसंद
- फोटो : freepik.com
नए माता-पिता को पसंद
नए पेरेंट्स के बीच पैसेंजर पेरेंटिंग स्टाइल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि यह उन्हें अपने करियर और पेरेंटिंग के बीच संतुलन बनाने का मौका देता है। इस शैली में माता-पिता बच्चे को अपनी गति से सीखने और अनुभव लेने की आजादी देते हैं और जरूरत पड़ने पर ही मार्गदर्शन करते हैं। इससे बच्चे आत्मनिर्भर बनते हैं और माता-पिता को अपनी प्रोफेशनल लाइफ पर भी फोकस करने का समय मिलता है। यह पेरेंटिंग स्टाइल आधुनिक जीवन-शैली के अनुरूप है।
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दोनों को आजादी
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दोनों को आजादी
पैसेंजर पेरेंटिंग के कई लाभ हैं, जो बच्चे और माता-पिता, दोनों के विकास में सहायक होते हैं। इस शैली में बच्चे को अपनी पसंद, निर्णय और अनुभवों से सीखने की स्वतंत्रता मिलती है, जिससे आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। सीमाएं कम होने पर बच्चे नई बातें खोजते और सोचते हैं, जो उनके विकास में सहायक हैं। वे समस्याओं का समाधान खुद करना सीखते हैं और उन पर परफेक्शन का दबाव नहीं होता। इससे वे बिना भय के अपनी रुचियां विकसित कर पाते हैं। कह सकते हैं कि यह पेरेंटिंग स्टाइल बच्चे को जीवन के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण देता है और पारिवारिक रिश्तों में भी संतुलन बनाए रखता है।
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नकारात्मक पहलू
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नकारात्मक पहलू
हर चीज की सीमा होती है, लेकिन पैसेंजर पेरेंटिंग में बच्चों को पूरी आजादी दी जाती है। वहीं कई बार जरूरत पड़ने पर भी वे माता-पिता का मार्गदर्शन नहीं प्राप्त कर पाते, जिससे उनके लिए सही-गलत का फर्क समझना मुश्किल हो जाता है और वे दिशाहीन हो जाते हैं। माता-पिता अपनी भूमिका गैजेट्स के माध्यम से पूरी करने का प्रयास करते हैं, जिससे बच्चा आपसे भावनात्मक दूरी बना लेता है। साथ ही अकेले रहना उसे अकेलेपन का अनुभव कराता है। इसलिए चाहे आप कोई भी पेरेंटिंग स्टाइल अपनाएं, लेकिन अपनी भूमिका अच्छी तरह अदा करें।
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बच्चा चालक तो आप मैप बनें
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बच्चा चालक तो आप मैप बनें
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान, दिल्ली में क्लिनिकल साइकोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रेरणा शर्मा बताती हैं, पैसेंजर पेरेंटिंग बच्चों में आत्मनिर्भरता का बीज बोती है। ऐसे में यदि पैसेंजर पेरेंटिंग का सही तरीके से पालन किया जाए तो यह बच्चे का भविष्य सवांरने में एक अहम रोल अदा कर सकती है। बस जरूरी है तो इस बात को समझना कि जहां बच्चा चालक हो, वहां माता-पिता मैप की तरह और सहारा बनकर उसके साथ चलें। साथ ही उसे हमेशा यह अहसास दिलाएं कि भले ही वह अपने निर्णय खुद ले रहा हो, पर माता-पिता हर वक्त सलाह, सहयोग और सुरक्षा के लिए उसके साथ है। आप इसे अच्छी तरह समझ लें कि पेरेंटिंग एक ऐसा बगीचा है, जहां पौधे को बढ़ने की आजादी तो दी जाती है, लेकिन समय-समय पर पानी, धूप और छांव का ध्यान आपको ही रखना होता है, तभी वह फलता-फूलता है।
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