लक्ष्मी कुमारी
आराध्या और रोहन की मुलाकात परिवार की रजामंदी से एक कॉफी शॉप में हुई थी। दोनों के ही अपने-अपने सपने थे, जिनमें वे व्यस्त थे, लेकिन जब उनकी आंखें मिलीं तो दोनों को एक अजीब-सा कनेक्शन महसूस हुआ। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ी और वे एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताने लगे। आराध्या एक स्वतंत्र विचारों वाली लड़की थी, जो अपने करियर और निजी जीवन में संतुलन बनाने की कोशिश कर रही थी। रोहन भी महत्वाकांक्षी व्यक्ति था और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। जैसे-जैसे उनकी मुलाकातें बढ़ीं, उनके रिश्ते गहरे होते चले गए। आराध्या और रोहन ने महसूस किया कि वे एक-दूसरे के साथ सहज और सुरक्षित महसूस करते हैं। दोनों ने अपने विचारों और भावनाओं को साझा किया और एक दिन शादी के खूबसूरत बंधन में हमेशा के लिए बंध गए।
मगर इस रिश्ते में ऐसा क्या खास था? दरअसल, आराध्या और रोहन का यह रिश्ता नई पीढ़ी में आ रहे उस बदलाव को दर्शाता है, जिसको अभी तक पुराना चलन कहकर यह पीढ़ी खारिज करती आ रही थी। एक मुलाकात में ही सारी जन्म-कुंडली खंगाल कर हां या न कर देना सामज की रीत है। रिश्ता बन गया तो आगे चलकर ‘जो भी होगा, अच्छा होगा और सब देखा जाएगा’ की सोच पर नई पीढ़ी को यकीन नहीं है, बल्कि वो जीवन के इस सबसे बड़े फैसले को सोच-समझ कर लेने में भरोसा करती है। अब उसे कोई शॉर्ट टर्म पसंद नहीं और भविष्य को अदृश्य समझ रिश्ते में आगे बढ़ने की कोई जल्दबाजी भी नहीं, क्योंकि जो भी होगा, फ्यूचर प्रूफ होगा! यही आज का ट्रेंड है, जिसे नाम मिला है- ‘फ्यूचर प्रूफिंग’।
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भविष्य सुरक्षा का बंधन
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भविष्य सुरक्षा का बंधन
फ्यूचर प्रूफिंग यानी भविष्य की सुरक्षा। अपने भविष्य को समाज, पैसे, करियर और रिश्ते के नजरिए से मजबूत और टिकाऊ बनाने के प्रयासों को फ्यूचर प्रूफिंग कह सकते हैं। नई पीढ़ी की महिलाएं अब अपने प्यार भरे रिश्ते को तभी आगे बढ़ाना पसंद करती हैं, जब उन्हें भरोसा हो जाए कि जिसके साथ आगे जीवन बिताना है, वह बस नाम का ही साथी न हो। वह पैसे और रिश्तों की कद्र करे, साथ में करियर को आगे बढ़ाने में भी मददगार हो और सबसे बड़ी बात उसे समझे। अब सिर्फ आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा भी फ्यूचर प्रूफिंग में महत्वपूर्ण है।
एक तरह से कह सकते हैं कि फ्यूचर प्रूफिंग स्थायी बंधन में बंधने से पहले, आगे रिश्तों का स्वरूप कैसा होगा, इसका सटीक अनुमान लगाकर आगे बढ़ने का एक ट्रेंड है। जब भरोसा हो जाए कि आगे चलकर उनके काम, उनकी भावनात्मक, आर्थिक, सामाजिक, कॅरिअर जैसे मुद्दों की अनदेखी नहीं की जाएगी, उन्हें समर्थन मिलेगा और साथी के साथ परिवार का साथ मिलेगा, तभी वे उस रिश्ते में आगे बढ़ने का औचित्य समझ रही हैं।
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सम्मान और सहयोग
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सम्मान और सहयोग
आधुनिक दौर में रिश्ते समानता और आपसी सम्मान पर आधारित हैं। इसका अर्थ है, पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ना और घर के अंदर एवं बाहर एक-दूसरे के प्रयासों की सराहना करना। इसका मतलब एक-दूसरे के व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में सहयोग करना भी है। जब एक साथी करियर में बदलाव, व्यक्तिगत चुनौती या कठिन पारिवारिक स्थिति का सामना कर रहा हो तो दूसरे का सहयोग बहुत बड़ा अंतर ला सकता है। एक टीम होने का यह अहसास, खासकर मुश्किल समय में वास्तव में एक रिश्ते को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाता है। भारत में विवाह को अक्सर दो परिवारों के मिलन के रूप में देखा जाता है।
जहां पारिवारिक सहयोग एक बड़ी ताकत हो सकता है, वहीं ससुराल वालों की अपेक्षाओं और विचारों को समझना तनाव का कारण भी हो सकता है। किसी रिश्ते को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने में दोनों परिवारों के साथ स्पष्ट लकीरें खींचना और उनकी परंपराओं तथा मूल्यों का सम्मान करना शामिल है, जो आज की पीढ़ी अपने और नए परिवार में चाहती है।
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भावनात्मक साथी
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भावनात्मक साथी
फ्यूचर प्रूफिंग डेटिंग चलन का ही एक आधुनिक रूप है। डेटिंग में आप थोड़ी देर के लिए किसी से मिलती हैं। छोटी और कम गंभीर बातें करती हैं। एक-दूसरे को थोड़ा-बहुत जानने की कोशिश करती हैं। फ्यूचर प्रूफिंग भावनात्मक जुड़ाव के साथ भावनात्मक सुरक्षा का भी एक नाम है। ऐसे रिश्ते में महिला अपने लिए एक सुरक्षित स्थान खोज लेती है और विचारों तथा भावनाओं को बिना किसी झिझक के साझा कर सकती है। इस रिश्ते में दोनों अपने विचारों और भावनाओं को साझा तथा महसूस करते हैं कि वे एक-दूसरे के साथ सहज एवं सुरक्षित हैं। यह भावनात्मक सुरक्षा भविष्य को सुंदर और सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसके बिना कोई भी रिश्ता बेमानी होता है।
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विचारों की स्वतंत्रता
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विचारों की स्वतंत्रता
पहले के दौर में आर्थिक चिंताएं लड़की की प्राथमिकता में नहीं होती थीं। जिसके साथ रिश्ता तय होता था, उसका कर्तव्य होता था कि वह उसके साथ ही परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी उठाए। लेकिन आज के समय में छोटे-बड़े शहरों में ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छी जिंदगी जीने के लिए आर्थिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए।
महानगरों में तो एक की आमदनी से आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं आ सकती। ऐसे में महिलाएं शादी के बाद भी उनकी शिक्षा और नौकरी बनी रहे, इसकी गारंटी मांग रही हैं। कई रिश्ते तो इसी कारण नहीं चल पाते कि लड़का नहीं चाहता, लड़की शादी के बाद नौकरी करे। फ्यूचर प्रूफिंग में लड़की इस बात को भी परखती है और अपने आर्थिक लक्ष्य साझा करती है।
अगर दोनों लोग आर्थिक लक्ष्यों को साझा करते हैं और उन्हें महसूस होता है कि वे एक-दूसरे के साथ मिलकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और भविष्य को संवार सकते हैं तो यह रिश्ता आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ जाता है।