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कविता: नहीं हारना

                
                                                         
                            कविता: नहीं हारना
                                                                 
                            

रात भर की बरसात से,
से हुआ हर क्षेत्र नम ।

मिट्टी जब गीली हुई,
रास्ते बने दुर्गम ।

हर डगर पर संभलकर ,
जो गिरकर फिर उठे ।

पंक को हराकर मानव,
फिसलन से भी जीते ।।

 
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49 मिनट पहले

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