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यहां 125 साल से परोसे जा रहे हैं शाकाहारी व्यंजन, इस रेस्त्रां की जान लें विशेषता

Thu, 23 May 2019 08:16 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Thu, 23 May 2019 08:16 AM IST
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world oldest switzerland restaurant vegetarian serving indian food from 125 years

विश्वभर में वीगन और वेजिटेरियन को अपनाने को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं। इस बीच स्विट्जरलैंड के रेस्त्रां का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि वह 125 वर्षों से सिर्फ शाकाहारी खाना ही परोस रहा है। स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में स्थित हॉस हितल रेस्त्रां अपने आप में कुछ खास है। करीब सवा सौ साल पहले इस रेस्त्रां की स्थापना की गई थी। तब से लेकर आज तक यहां केवल शाकाहारी और वीगन (मांसाहार और दूध की बनी चीजों को छोड़कर) व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इसी खूबी के चलते हॉस हितल का नाम गिनीज रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। 



 

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- फोटो : file photo
हॉस हितल की शुरुआत 1898 में हुई थी। अब इसे हितल परिवार की चौथी पीढ़ी चला रही है। खास बात यह कि यहां के खाने में भारतीय, एशियाई, भूमध्यसागरीय और स्थानीय स्विस चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। हॉस हितल की ज्यूरिख में आठ ब्रांच हैं। मुख्य होटल में कई मंजिलें हैं। स्विट्जरलैंड में नॉन-वेज काफी पसंद किया जाता है। हितल वेज्जी को सम्मान इसलिए हासिल है क्योंकि रेस्त्रां में कभी भी नॉन-वेज परोसने को लेकर नहीं सोचा गया। 19वीं सदी के अंत में हितल वेज्जी की जब स्थापना हुई थी, तब जर्मनी से प्रभावित एक नॉन-वेज रेस्त्रां का बोलबाला था। उस दौरान स्विट्जरलैंड के कई रसूखदार शाकाहारी लोगों का मजाक उड़ाते थे। 
 
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food habits

रेस्त्रां की कहानी बड़ी दिलचस्प है। इसकी स्थापना जर्मन टेलर एम्ब्रोसियस हितल ने की थी। उस वक्त 24 साल के हितल को डॉक्टर ने गंभीर आर्थराइटिस की शिकायत बताई थी और कहा था कि नॉन-वेज छोड़ दो, नहीं तो जल्दी मौत हो जाएगी। उस वक्त मांस रहित खाना आमतौर पर नहीं मिलता था। हितल को मुश्किल से एक अकेला रेस्त्रां एब्सटिनेंस कैफे मिला, जो शाकाहारी था। एम्ब्रोसियस को यहांं के शाकाहारी व्यंजन भा गए और रिकवरी भी होने लगी। एम्ब्रोसियस को यहां की कुक मार्था न्यूपेल से प्यार हो गया और शादी कर ली। 1904 में रेस्त्रां का नाम बदलकर हॉस हितल कर दिया। 

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एम्ब्रोसियस के परपोते रॉल्फ बताते हैं, ''मेरे परदादा लोगों से प्यार करते थे। लोग उनकी तरफ आकर्षित होते थे। रेस्त्रां अपने असली रूप में 1951 में आया। एम्ब्रोसियस की बहू मार्गरिथ दिल्ली में वर्ल्ड वेजिटेरियन कांग्रेस में आईं। उन्हें भारत के मसाले खासकर धनिया, हल्दी, इलायची और जीरा काफी पसंद आए। वे उन्हें स्विट्जरलैंड भी लेकर आईं और भारतीय अंदाज में खाना बनाना शुरू किया। 
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