प्रयागराज की पावन धरती पर देश के कोने-कोने से लोग कुंभ स्नान करने के लिए आए हुए हैं।ऐसे में हमारी सरकार की तरफ से उनके रहने और खाने पीने की अच्छी व्यवस्था की गई है जिसे पर्यटकों को कोई दिक्कत ना हो।संगम में डूबकी लगाने के लिए आएं विदेशी पर्यटकों को भी भारतीय रीति-रिवाज पसंद आने लगे हैं।
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कुंभ के दौरान इस बात पर गौर किया गया कि विदेशी साधु-संतों को भी हमारे देश की संस्कृति पसंद आने लगी है
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इस बार कुंभ का रंग विदेशियों पर भी चढ़ते देखा गया है।उनके लिए इस कुंभ में खाने पीने की एक खास व्यवस्था की गई है।जिसमें विदेशी साधु-संतों की खाने की थाली में एक राजस्थानी डिश को शामिल किया गया है।खास बात यह है कि विदेशियों को यह डिश और देश की संस्कृति पसंद भी आ रही है।
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विदेशी भक्तों को बाकायदा जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण करते देखा जा रहा है
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कुंभ के मेले में विदेशी भक्तों को भी बाकी लोगों की तरह बाकायदा जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण करते देखा जा रहा है।शिविर में हर रोज लंगर खाने के लिए इन लोगों की लंबी भीड़ नजर आती है। वहां के लोगों का कहना है विदेशी मेहमान भी भारतीय संस्कृति को समझते हुए दिखाई देते हैं।
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नासिक,उज्जैन और हरिद्दार में कुंभ का लुत्फ उठा सके चुके हैं
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संगम की रेती पर विदेशी संत और उनके यूरोपीय भक्तगणों का व्यंजन इन दिनों काली मिर्च, जीरा, हल्दी, इलायची, सरसों, मगरैल, अदरक के बिना अधूरा है। इसके अलावा संतों की रसोई का जायका बढ़ाने के लिए राजस्थान एवं गुजरात के खानसामे भी आए हैं।
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श्रद्धालुओं ने प्रयागराज की पावन धरती पर आस्था की डुबकी लगाई है
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विदेशी संतों के लिए भी यहां भारतीय मसालों से छौंक लगाए बिना तो कुछ बनया ही नहीं जाता है।खासतौर पर यहां दाल, बाटी, चोखा, मटर-शाही पनीर की तो डिमांड यहां रोज ही रहती है।इतना ही नहीं खाने पीने के अलावा यहां पहुंचा हर विदेशी भारतीय पोषाक में नजर आ रहा है। यहां तक उनके खाने-पीने का तरीका भी भारतीयों जैसा ही है।इसे पहले भी ये लोग नासिक,उज्जैन और हरिद्दार में कुंभ का लुत्फ उठाते हुए देखे जा चुके हैं।