विघ्नहर्ता श्री गणेश के साथ कई सारे रंग लेकर आएगा 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी का त्योहार। ये सच है कि महामारी के दौर में इस त्योहार को मनाने के लिए कई सारे प्रोटोकॉल्स का पालन करना जरूरी है। भले ही पहले जैसे पंडाल और गतिविधियां न हों लेकिन उल्लास वही होगा। ज्यादातर लोग घरों में गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना करेंगे। लेकिन इस कठिन दौर में गणपति का आगमन मन में सकारात्मकता का भाव भी जगाएगा। बाजार में जगह जगह सजी श्री गणेश की प्रतिमाएं इसी बात का प्रतीक हैं कि हर चुनौती का बप्पा सहज रहकर सामना करने की प्रेरणा देते हैं। गणपति बप्पा की स्थापना के कई अलग अलग नियम और कायदे होते हैं। कहीं 3 दिन के लिए गणपति जी की मूर्ति की स्थापना की जाती है तो कहीं 5-7 दिन। इसी प्रकार अलग अलग दिनों के मुताबिक, स्थापना और फिर विसर्जन होता है। खास बात यह कि इन दिनों के लिए घर में बच्चों से बूढ़ों तक एक उत्साह बना रहता है। जैसे- गणपति जी के लिए क्या नया प्रसाद बनाना है, सबको मिलकर आरती करनी है, आदि।
गणेश चतुर्थी विशेष: उल्लास और उत्साह का प्रतीक बप्पा का आगमन, गणपति उत्सव देता है ये खास संदेश
प्रकृति के करीब
बीते कुछ सालों में गणपति प्रतिमा को लेकर लोगों में बहुत जागरूकता आई है। आजकल ज्यादातर लोग शुद्ध मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना करना चाहते हैं। साल दर साल तालाबों या पानी के अन्य छोटे स्रोतों में निरादर पाती, खंडित मूर्तियां इस बात को स्पष्ट करती हैं कि ऐसे किसी पदार्थ से बनी मूर्तियां जो पानी में घुलनशील या बायोडिग्रेडेबल नहीं है, वह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ ही, आस्था पर भी प्रहार करता है। इसलिए मिट्टी से बनी, पानी में घुलनशील मूर्तियों को ही आजकल प्राथमिकता दी जाती हैं।
पर्यावरण के साथी गणेश
केवल मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा ही चलन में नहीं है। इसके अलावा आजकल सब्जियों और फूलों आदि के बीज रखकर भी गणेश प्रतिमाओं की रचना की जाती है। इन प्रतिमाओं को भी मिट्टी से ही बनाया जाता है और इनके भीतर बीज रखे जाते हैं। ताकि जब मूर्ति को घर में ही विसर्जित किया जाए तो वे बीज गमले या क्यारी में गिरें और फूलें। पर्यावरण के प्रति लोगों की इस तरह बढ़ती जिम्मेदारी त्योहारों को और भी सार्थक रूप देती हैं।
रोजगार का अवसर
गणेश चतुर्थी का यह समय कई छोटे उद्योगों और घर से काम करने वालों के लिए सुनहरा मौका भी लाता है। विशेषकर अभी कोरोना महामारी के आने के बाद से रोजी-रोटी के चले जाने से परेशान कई लोगों को गणेश चतुर्थी ने रोजगार देने का काम किया है। इसमें छोटी प्रतिमाएं बनाने वाले, फूल-माला वाले, पूजन सामग्री के पैकेट्स बेचने वाले, घर पर ही मोदक तैयार करके बेचने वाले आदि लोग शामिल हैं।
बच्चों के प्रिय गणपति बप्पा
गणपति बप्पा का आना बच्चों के लिए खास खुशी का पल होता है। सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं बप्पा को भोग लगाने के लिए तैयार किये गए लड्डू। उसमें भी मोतीचूर के लड्डू सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं। गणपति बप्पा इसलिये भी बच्चों के फेवरेट होते हैं क्योंकि उनसे जुड़ी कथाएं और बप्पा का स्वरूप उनमें उत्सुकता पैदा करते हैं। यही कारण है कि इन दस दिनों का इंतज़ार बच्चे साल भर करते हैं।