साल 2023 अब अपने आखिरी के चरणों में है। सेहत के मामले में देखें तो ये पूरा साल कई प्रकार की चुनौतियों से भरा रहा। पिछले तीन साल से अधिक समय से जारी कोरोना महामारी को भले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस साल 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' की सूची से बाहर कर दिया पर पूरे साल दुनिया के कई देशों में इस संक्रामक रोग के नए-नए वैरिएंट्स रिपोर्ट किए जाते रहे। यूके-यूएस सहित कई देशों में नए वैरिएंट्स के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या और गंभीर स्थिति वाले मरीजों के मामले भी दर्ज किए गए।
Year Ender 2023: दुनियाभर में इस साल इन चार संक्रामक रोगों का देखा गया खतरा, 2024 में भी रहना होगा अलर्ट
कोरोना का नहीं कम हुआ खतरा
साल 2019 के अंत से दुनियाभर में जारी कोरोना महामारी का असर साल 2023 में भी देखा जाता रहा। साल के शुरुआती महीनों में संक्रमण के कम होते वैश्विक खतरे को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने इसे 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' की सूची से बाहर तो कर दिया पर कोरोना का जोखिम जमीनी स्तर पर कम नहीं हुआ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन में जनवरी 2020 में कोरोना वायरस की महामारी को इंटरनेशनल ग्लोबल इमरजेंसी घोषित किया था।
इस साल भारत सहित कई देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट में कई म्यूटेशनों के साथ नए सब-वैरिएंट्स देखे जाते रहे जिसने कई देशों में समय-समय पर संक्रमण को बढ़ाया। जुलाई-सितंबर तक अमेरिका-यूके जैसे देशों में अस्पतालों में रोगियों की संख्या स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बनी रही।
बच्चों में देखे गए टोमैटो फीवर के मामले
भारत सहित दुनिया के कई देशों में साल 2023 में टोमैटो फीवर नामक बीमारी ने भी लोगों को परेशान किया। केरल में मानसून के मौसम के दौरान टोमैटो फीवर के मामलों में वृद्धि देखी गई है, धीरे-धीरे इसके मामले कई अन्य राज्यों में भी बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए। टोमैटो फीवर के कारण बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर देखा गया जिसमें बुखार के साथ थकान और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण और त्वचा पर लाल टमाटर जैसे छोटे-छोटे दाने देखे गए।
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के मामले
साल 2023 में कोरोना के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस के मामले बढ़े। ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) भी कोरोना की ही तरह से श्वसन पथ को संक्रमित करता है, हालांकि कोरोना के इतर इस वायरस के कारण ऊपरी और निचले दोनों श्वसन पथ में संक्रमण का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शिशुओं और बुजुर्गों, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उनमें मेटान्यूमोवायरस के कारण गंभीर बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। इसके लक्षण आमतौर पर सामान्य फ्लू की तरह के ही होते हैं ऐसे में लोग इस संक्रमण को लेकर काफी कंफ्यूज रहते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कई हिस्सों में साल 2023 में मई-जून के महीनों में एचएमपीवी के कारण संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े थे। मार्च में, अमेरिका में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के लिए लगभग 11 प्रतिशत पीसीआर और 20 प्रतिशत एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट सकारात्मक आए थे।
चीन में निमोनिया के मामलों ने बढ़ाई चिंता
साल के आखिरी के महीनों में चीन में बच्चों में तेजी से बढ़े निमोनिया के मामलों ने विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ा दी। नवंबर के महीने में चीन के कई शहरों में इन दिनों रहस्यमयी श्वसन बीमारी का जोखिम बढ़ता हुआ देखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में निमोनिया और श्वसन संक्रमण की शिकायत के साथ मरीजों की संख्या में बढ़ी। इस रोग का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों में देखा जा रहा गया। बढ़ते खतरे को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने गंभीरता दिखाते हुए संक्रामक रोग की रोकथाम के लिए प्रयास करते रहने की सलाह दी।
बढ़ते जोखिमों को देखते हिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, चीन में सर्दियों के मौसम की शुरुआत के कारण इस रोग के मामले बढ़े और महामारी के बाद ये पहली सर्दी है जब यहां किसी प्रकार के प्रतिबंध नहीं था। लॉकडाउन और अन्य प्रतिबंधों की वजह से संक्रामक रोगों से बचाव को लेकर सुरक्षाकवच बना हुआ था जो अब टूट रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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