हाल ही में सामने आया कोरोना का एक्सई वैरिएंट, दुनियाभर के लिए बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। अध्ययनों में इस वैरिएंट की प्रकृति जिस तरह की संक्रामकता वाली बताई जाती है, वह निश्चित ही डराने वाली है। प्रारंभिक शोध बताते हैं कि नया एक्सई वैरिएंट, अब तक के सबसे संक्रामक माने जा रहे कोरोना के ओमिक्रॉन BA.2 से भी अधिक तेजी से लोगों में संक्रमण का कारण बन सकता है। जिस गति से यह दुनिया के कई देशों में फैल रहा है उसको लेकर हाल में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में लोगों को अलर्ट भी किया है। वैश्विक रिपोर्ट इस ओर भी इशारा करती हैं कि यह वैरिएंट बच्चों को संभवत: अधिक शिकार बना रहा है।
XE Varient: बच्चों में बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले, जानिए किस तरह के लक्षण आ रहे हैं सामने, कैसे करें बचाव?
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एक्सई वैरिएंट से बच्चों को खतरा
एक्सई वैरिएंट को लेकर दुनियाभर से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि वयस्कों के साथ एक्सई वैरिएंट का खतरा बच्चों में भी अधिक देखा जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि बच्चों में ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों वाले ही रिपोर्ट किए जा रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना वायरस, शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है, ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। अब तक बच्चों का टीकाकरण न हो पाना बड़ी चिंता का विषय है।
किस तरह के लक्षण सामने आए हैं?
एक्सई वैरिएंट से बच्चों में संक्रमण को लेकर आई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ज्यादातर बच्चों में हल्के लक्षण ही हैं जो आसानी से ठीक हो जा रहे हैं। अब तक रिपोर्ट किए गए सामान्य लक्षणों में बुखार, नाक बहना, खांसी, शरीर में सामान्य दर्द, उल्टी, दस्त, पेट में दर्द जैसी समस्याएं देखी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेष कहते हैं, गंभीर लक्षण सिर्फ उन्हीं बच्चों में देखे जा रहे हैं जो पहले से ही अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार हैं। बच्चों में लक्षणों को लेकर माता-पिता के लगातार ध्यान देते रहना चाहिए।
कोमोरबिडिटी वाले बच्चों का टीकाकरण बहुत जरूरी
देश में कोविड-19 के बढ़ते मामले, विशेषकर बच्चों में संक्रमण के जोखिम को देखते हुए भारत के प्रमुख बायोमेडिकल वैज्ञानिक डॉ गगनदीप कांग ने कोमोरबिडिटी वाले बच्चों के जल्द से जल्द टीकाकरण पर जोर दिया है। जिस तरह से नए वैरिएंट्स की संक्रामता दर देखी जा रही है, उससे बच्चों में संक्रमण का खतरा हो सकता है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त डेटा नहीं हैं कि देश में एक्सई वैरिएंट से बच्चों में संक्रामकता की दर कैसी है, हालांकि हमें पहले से ही इसको लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
देश में बच्चों का टीकाकरण
देश में फिलहाल 12 साल से ऊपर के बच्चों को कोविड वैक्सीन देने को मंजूरी मिली है। भारत में 12-18 साल तक के बच्चों और किशोरों के लिए कॉर्बेवैक्स, कोवाक्सिन और जाइकोब-डी वैक्सीन को उपयोग में लाने को मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि देश में अब भी बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार काफी कम है। जिस तरह से हाल ही में कम आयु के लोगों में संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, वह विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाने वाले हैं।