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आई हेल्थ: आंखों में नहीं है कोई दिक्कत, क्या फिर भी आई टेस्ट जरूरी? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

Thu, 08 Oct 2026 07:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 08 Oct 2026 07:03 PM IST
सार

World Sight Day 2026: साफ दिखाई देना हमेशा आंखों के पूरी तरह स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियां शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षण के नुकसान कर सकती हैं। नियमित रूप से आंखों की जांच से इन समस्याओं का समय पर पता लगाने और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।

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world sight day 2026 Why regular Eye Exams is necessary Even When Your Vision Is Perfect
आंखों की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

अगर कोई पूछे की अच्छी सेहत का क्या मतलब है? तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा- स्वस्थ और फिट दिखना। पर हर बार स्वस्थ दिखना ही सेहतमंद होने की गारंटी नहीं होती है।



असल में शरीर में कई बीमारियां इतनी साइलेंट तरीके से बढ़ती रहती हैं कि बाहर से उसका अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता। आंखों के मामले में भी ऐसा ही है। आंखों से साफ दिखाई देना आमतौर पर इस बात का संकेत माना जाता है कि आंखें पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। आंखों की कई बीमारियां ऐसी हैं जिनकी शुरुआत में न दर्द होता है, न धुंधलापन और न ही नजर में कोई बड़ा बदलाव महसूस होता है। आप रोजमर्रा के काम करते रहते हैं और इस बात का अंदाजा ही नहीं होता कि आंख के अंदर धीरे-धीरे नुकसान हो रहा है।

यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहने की सलाह देते हैं। भले ही आपकी आंखें बिल्कुल ठीक हों फिर भी डॉक्टर की सलाह पर जांच कराते रहना जरूरी है।

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आंखों की जांच कराते रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com

आंखों की समय पर जांच जरूरी

आज वर्ल्ड साइट डे यानी दृष्टि दिवस है। दुनिया भर में लोगों को अंधत्व, दृष्टिहीनता और आंखों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ये मनाया जाता है। इस साल की थीम है- अपनी आंखों से प्यार करें।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ समीर रंजन कहते हैं, आंखों से प्यार करते हैं तो नियमित रूप से जांच कराते रहें कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है? जिन लोगों को पहले से डायबिटीज-ब्लड प्रेशर की समस्या है उनके लिए ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आंखों की जांच में डॉक्टर आंख के अंदर मौजूद रेटिना, ऑप्टिक नर्व और आंख के दबाव जैसी चीजों को भी देखते हैं। ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्याओं में समय पर पता चलना बहुत जरूरी हो जाता है। इसमें होने वाली देरी से रोशनी जाने तक का खतरा रहता है। 

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आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

ग्लूकोमा में लंबे समय तक नहीं दिखते लक्षण

ग्लूकोमा आंखों की गंभीर बीमारी है जिसमें ऑप्टिक नर्व यानी आंख से दिमाग तक तस्वीर पहुंचाने वाली नस को नुकसान पहुंच सकता है। इसकी सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। ये डैमेज धीरे-धीरे बढ़ता है और कई लोगों को इसका तब पता चलता है जब ऑप्टिक नर्व को गंभीर नुकसान हो चुका होता है।
 

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  उम्र बढ़ने, परिवार में ग्लूकोमा होने या बीपी-शुगर जैसे अन्य जोखिम होने पर नियमित जांच और भी जरूरी हो जाता है।
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डायबिटीज का आंखों पर असर - फोटो : Freepik.com

डायबिटीज से रेटिना को खतरा

जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर हाई रहता है उनमें डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने पर रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है। 
 

  • शुरुआती अवस्था में आपको नजरों में कोई खास दिक्कत नहीं महसूस होती, लेकिन आंख के अंदर बदलाव शुरू हो सकते हैं। 
  • यही वजह है कि डायबिटीज वाले लोगों के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई नियमित आंखों की जांच जरूरी है। 
  • नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार डायबिटीज वाले लोगों को कम से कम साल में एक बार डाइलेटेड आई एग्जाम जरूर करानी चाहिए।
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आंखों की समस्याएं - फोटो : AmarUjala.com/AI

कब हो जाएं अलर्ट?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर अचानक आपकी नजर धुंधली हो गई है, आंखों में तेज दर्द रहता है, आंखें लाल रहती हैं तो इसे सामान्य थकान मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए। अचानक होने वाले ऐसे लक्षण कुछ बार गंभीर समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं और इनमें तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत हो सकती है।
 

  • आंखें ठीक दिखना और आंखें अंदर से पूरी तरह स्वस्थ होना दो अलग बातें हैं। इसलिए सिर्फ नजर के आधार पर आंखों की सेहत का अंदाजा लगाने के बजाय उम्र और जोखिम के अनुसार नियमित विस्तृत जांच कराना आवश्यक है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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