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विश्व दृष्टि दिवस 2026: बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए? जानें सही समय और आंखों की देखभाल के तरीके
Tue, 06 Oct 2026 10:58 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 06 Oct 2026 10:58 AM IST
सार
World Sight Day 2026: आज के समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि ये असल में कितना होना चाहिए और इसे कैसे कम करें।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
- फोटो : AI
World Sight Day 2026: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, बच्चे कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए और लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर क्या असर पड़ सकता है।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
- फोटो : AI
बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2 से 4 साल की उम्र के बच्चों के लिए बैठकर स्क्रीन देखने का समय एक घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए; इससे कम समय बेहतर माना जाता है। एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन आधारित गतिविधियों की सलाह नहीं दी जाती। हालांकि बड़े बच्चों के लिए केवल घंटे गिनना ही पर्याप्त नहीं है।
छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2 से 4 साल की उम्र के बच्चों के लिए बैठकर स्क्रीन देखने का समय एक घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए; इससे कम समय बेहतर माना जाता है। एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन आधारित गतिविधियों की सलाह नहीं दी जाती। हालांकि बड़े बच्चों के लिए केवल घंटे गिनना ही पर्याप्त नहीं है।
बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
- फोटो : AI
ज्यादा स्क्रीन देखने से आंखों पर क्या असर हो सकता है?
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों में आंखों में थकान, सूखापन, सिरदर्द और धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। लगातार पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करने और बाहर कम समय बिताने से मायोपिया यानी दूर की चीजें धुंधली दिखाई देने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों में आंखों में थकान, सूखापन, सिरदर्द और धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। लगातार पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करने और बाहर कम समय बिताने से मायोपिया यानी दूर की चीजें धुंधली दिखाई देने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
- फोटो : AI
बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखने के तरीके
- बच्चों को लगातार लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचाएं।
- हर 20 मिनट में स्क्रीन से नजर हटाकर करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखने की आदत डालें।
- बच्चों को रोजाना पर्याप्त समय बाहर रोशनी में खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन की सामग्री में बच्चों के लिए प्रतिदिन कम से कम 90 मिनट बाहर दिन के उजाले में रहने की सलाह दी गई है।
- सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और घर में स्क्रीन-मुक्त समय तय करें।
- मोबाइल या टैबलेट को आंखों के बहुत पास रखकर देखने से बचाएं।
- बच्चों की पढ़ाई, खेल, नींद और परिवार के साथ समय को स्क्रीन के कारण प्रभावित न होने दें।
- अगर बच्चे को बार-बार आंखों में दर्द, सिरदर्द, आंखें मिचमिचाने या दूर की चीजें देखने में परेशानी हो रही है, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
- फोटो : AI
माता-पिता कैसे कम करें बच्चों का स्क्रीन टाइम?
अचानक स्क्रीन पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे समय कम करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। घर में भोजन के समय, पढ़ाई के दौरान और सोने से पहले स्क्रीन-मुक्त नियम बनाए जा सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स भी परिवार की दिनचर्या के अनुसार व्यक्तिगत मीडिया योजना बनाने और स्क्रीन के साथ-साथ पढ़ने, बाहर खेलने और पारिवारिक गतिविधियों के लिए समय रखने की सलाह देता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
अचानक स्क्रीन पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे समय कम करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। घर में भोजन के समय, पढ़ाई के दौरान और सोने से पहले स्क्रीन-मुक्त नियम बनाए जा सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स भी परिवार की दिनचर्या के अनुसार व्यक्तिगत मीडिया योजना बनाने और स्क्रीन के साथ-साथ पढ़ने, बाहर खेलने और पारिवारिक गतिविधियों के लिए समय रखने की सलाह देता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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