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World Hepatitis Day 2024: मानसून में बढ़ जाता है हेपेटाइटिस का खतरा, बचाव के लिए डॉक्टर ने बताए ये तीन उपाय

Sun, 28 Jul 2024 11:20 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 28 Jul 2024 11:20 AM IST
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हेपेटाइटिस संक्रमण का खतरा - फोटो : istock

हेपेटाइटिस, लिवर को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली संक्रामक बीमारियों में से एक है। मानसून के दिनों में इसका खतरा और भी बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में दूषित पानी और भोजन के सेवन के कारण बड़ी संख्या में हेपेटाइटिस संक्रमण के मामलों का निदान किया जाता रहा है। हेपेटाइटिस की समस्या लिवर में सूजन का कारण बनती है। संक्रमितों में लिवर डेमैज, लिवर फेलियर, सिरोसिस, लिवर कैंसर या मृत्यु का भी खतरा हो सकता है।



हेपेटाइटिस के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और इस रोग से बचाव को लेकर लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस गंभीर संक्रामक रोग से बचाव के लिए सभी लोगों को निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। स्वच्छता में कमी और खान-पान को लेकर बरती गई असावधानी के कारण इसका जोखिम बढ़ जाता है।

आइए जानते हैं कि बरसात के दिनों में हेपेटाइटिस से बचाव के लिए क्या उपाय किए जाने जरूरी हैं?

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हेपेटाइटिस का जोखिम - फोटो : istock

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित एक अस्पताल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ नरेश माधव बताते हैं, मानसून का समय पाचन से संबंधित कई तरह की बीमारियों के जोखिमों को बढ़ा देता है।  हेपेटाइटिस संक्रमण का खतरा भी इसमें काफी बढ़ जाता है। वैसे तो टीकाकरण अभियान के चलते अब इसमें कमी आई है पर अब भी हर साल बड़ी संख्या में लोगों में इस संक्रामक रोग का निदान किया जाता रहा है।

हेपेटाइटिस का मतलब है लिवर की सूजन, इसपर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो कई तरह की गंभीर समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। इसके अलावा बरसात के मौसम में पेट में संक्रमण होना भी आम है। इसके कारण पेचिश और दस्त के साथ पेट दर्द और मतली की दिक्कत हो सकती है।

इन समस्याओं से बचाव के लिए तीन बातों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

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साफ पानी ही पिएं - फोटो : freepik.com

1. साफ पानी का ही सेवन करें

मानसून के दौरान पानी का दूषित होना एक आम समस्या है, विशेषतौर पर जिन इलाकों में बाढ़ आ जाती है वहां इसका खतरा और भी बढ़ जाता है, जिससे हेपेटाइटिस हो सकता है। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। घर में वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। यात्रा करते समय अपनी खुद की पानी की बोतल साथ रखें।

साफ पानी के साथ स्वच्छ और अच्छे से पका खाना ही खाएं। स्ट्रीट फूड्स से बचें। कच्चे सलाद का सेवन तभी करें जब फल और सब्जियां ठीक से धुली हुई और छीली हुई हों।

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हाथों की स्वच्छता - फोटो : freepik.com

2. स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी

हेपेटाइटिस ए और ई जैसे संक्रमण का मुख्य कारण अस्वच्छता को माना जाता है। बरसात हो या कोई भी मौसम हाथ की स्वच्छता बहुत जरूरी है। खाने से पहले, शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद और संभावित रूप से दूषित सतहों को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। बार-बार मुंह को छूने से बचें। हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखकर हेपेटाइटिस के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।

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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2024 - फोटो : freepik.com

3. हेपेटाइटिस से बचाव के लिए टीकाकरण 

कुछ प्रकार के टीके इस संक्रामक रोग के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी साबित हुए हैं। हेपेटाइटिस ए और बी के लिए टीका लगवाने के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी के टीके लगाने की सलाह देते हैं। आमतौर पर बचपन के पहले 6 महीनों में तीन टीके लगाए जाते हैं। हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीकाकरण हेपेटाइटिस डी को भी रोक सकता है।

वैक्सीनेशन से संक्रमण को रोकने और संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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