हेपेटाइटिस, लिवर में होने वाले सूजन की बीमारी है, जो कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। लिवर में होने वाली सूजन की स्थिति कुछ प्रकार के वायरस (वायरल हेपेटाइटिस), रसायन, दवाओं, शराब,आनुवंशिक विकारों के कारण हो सकती है। साल 2019 में हेपेटाइटिस-बी के कारण आठ लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। वैश्विक स्तर पर इस रोग के जोखिमों को कम करने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है।
World Hepatitis Day 2023: बरसात के दिनों में हेपेटाइटिस का जोखिम होता है अधिक, जानिए इस रोग से कैसे करें बचाव
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मानसून के दिनों में होता है जोखिम
डॉक्टर कहते हैं, हेपेटाइटिस कई प्रकार का हो सकता है, हालांकि मानसून के दौरान हेपेटाइटिस-ए और ई के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। ये दोनों ही दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलते हैं। वैसे तो हेपेटाइटिस को अल्पकालिक समस्या के रूप में जाना जाता है, पर आधे से अधिक लोगों में इसके दीर्घकालिक संक्रमण का भी खतरा हो सकता है।
लिवर में होने वाली किसी भी समस्या का असर पूरे शरीर की सेहत को प्रभावित करने वाला हो सकता है, इसलिए इसके जोखिमों को कम करने के लिए प्रयास किए जाते रहने चाहिए।
हेपेटाइटिस-ए का खतरा अधिक
डॉक्टर बताते हैं, हेपेटाइटिस ए अत्यधिक संक्रामक है, हालांकि लेकिन लंबे समय तक लिवर के स्वास्थ्य पर बिना कोई महत्वपूर्ण प्रभाव डाले यह कुछ हफ्तों या महीनों तक भी रह सकता है। हेपेटाइटिस-ए, अस्वास्थ्यकर भोजन या दूषित पानी से फैलता है यही कारण है कि मानसून के मौसम में यह आम है। संक्रमण का कोई विशिष्ट उपचार तो नहीं है और इसलिए इसे फैलने से रोकना महत्वपूर्ण हो जाता है है।
जिन लोगों को क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याएं या पहले से ही लिवर की गंभीर है, उन्हें इसके कारण लिवर फेलियर और यहां तक कि मृत्यु का भी खतरा होता है।
हेपेटाइटिस ए और ई से कैसे बचें?
हेपेटाइटिस-ए और ई आमतौर पर भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है, यही कारण है कि बरसात के दिनों में इसका जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है। कुछ बातों को ध्यान में रखकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
- बाथरूम का उपयोग करने के बाद और खाने से पहले हाथ धोएं।
- यह सुनिश्चित करना जरूरी कि भोजन अच्छी तरह से पकाया गया है।
- यात्रा के दौरान केवल बोतलबंद पानी पीना चाहिए।
- उन फलों और सब्जियों से परहेज करें जिनमें थोड़ी भी सड़न हो।
- फलों-सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर ही इसका सेवन किया जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।