हृदय रोग वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। हर साल इससे संबंधित समस्याओं के कारण 1.92 से 2.05 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है। यानी दुनियाभर में होने वाली हर 3 मौतों में से लगभग 1 मौत के लिए इसे बड़ा कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, दिल की बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं, इसलिए अच्छी बात ये है कि अगर समय रहते इसके लक्षणों का पता लगा लिया जाए तो आप किसी बड़े खतरे से बच सकते हैं।
दिल की बात: एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट के बाद भी क्यों बढ़ा रहता है बैड कोलेस्ट्रॉल? डॉक्टर ने बताया
World Heart Day 2026: एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की समस्या युवा और फिट लोगों में भी बढ़ती देखी जा रही है। लाइफस्टाइल-खानपान में गड़बड़ी के अलावा जेनेटिक्स या फैमिली हिस्ट्री के कारण इसका स्तर ज्यादा हो सकता है। 18 साल से नियमित लिपिड प्रोफाइल जांच जरूरी है।
कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बारे में दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाने और दिल की समस्याओं को लेकर कम उम्र से ही अलर्ट रहने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को 'वर्ल्ड हार्ट डे' मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट डे 2026 का विषय है- "डॉन्ट मिस अ बीट"। इसमें दिल की बीमारी के छिपे हुए या हल्के स्तर के शुरुआती संकेतों को पहचानने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आगे चलकर कोई गंभीर समस्या न हो।
स्वस्थ लोगों को भी हो सकती है बैड कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर माना जाता है कि बैड कोलेस्ट्रॉल सिर्फ उम्रदराज लोगों की समस्या है या फिर यह उन लोगों में होती है जो ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना खाते हैं। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। डॉक्टर बताते हैं, भले ही आपकी उम्र कम हो, शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हों और खान-पान भी ठीक हो फिर भी एलडीएल बढ़ सकता है।
- सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हाई एलडीएल अक्सर कोई साफ संकेत नहीं देता। यानी न दर्द, न कोई खास परेशानी और न ही ऐसा लक्षण, जिससे समझा जा सके कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ चल रहा है। इसी वजह से नियमित जांच का महत्व बढ़ जाता है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
पुणे स्थित एक अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. समीर निगम बताते हैं, जिस तरह से कम उम्र वालों में हार्ट अटैक से मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं इसे देखते हुए अब हम लोग 18 साल की उम्र से नियमित लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
- डॉ. समीर कहते हैं, कई मामलों में देखा गया है कि मरीज नियमित एक्सरसाइज करता है और खान-पान का भी ठीक है पर जांच में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आता है।
- उम्र बढ़ना और शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहना दिल की बीमारी के जाने-पहचाने जोखिम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हाई एलडीएल की समस्या सिर्फ बुजुर्गों या अस्वस्थ जीवनशैली वाले लोगों में ही होता है।
- कम उम्र के ऐसे लोग, जिनकी दिनचर्या सक्रिय है और जो संतुलित खाना खाते हैं, उनमें जेनेटिक्स और परिवार में पहले से चली आ रही बीमारी यानी फैमिली हिस्ट्री के कारण भी एलडीएल बढ़ सकता है।
इन खतरों को देखते हुए डॉक्टर के पास जाएं तो ये 3 सवाल जरूर पूछें।
मेरा एलडीएल-सी कितना है?
एलडीएल-सी यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को आम भाषा में बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसका स्तर ज्यादा होने पर दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लाक और दूसरे पदार्थों की परत जमा हो सकती है।
- सबसे बड़ी बात यह है कि एलडीएल बढ़ने पर आमतौर पर बाहर से कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में आपका एलडीएल कितना है, इसका सही नंबर जानना बहुत जरूरी है। यही आगे की देखभाल और इलाज तय करने की पहली सीढ़ी है।
मेरे लिए एलडीएल कितना होना चाहिए?
डॉ समीर बताते हैं, एलडीएल की एक ही सीमा हर व्यक्ति के लिए फिट नहीं बैठती। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया यानी सीएसआई के अनुसार, ये आपके कार्डियोवैस्कुलर रिस्क प्रोफाइल से पता चलता।
- कम जोखिम: एलडीएल 116 mg/dL से कम होने चाहिए।
- मध्यम जोखिम: एलडीएल 100 mg/dL से कम
- ज्यादा जोखिम: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी होने पर 70 mg/dL से कम होना चाहिए।
- बहुत ज्यादा जोखिम: पहले हार्ट अटैक हो चुका हो, स्टेंट लगा हो या बाईपास सर्जरी हुई हो, तो 55 mg/dL से कम होना चाहिए।