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World Glaucoma Day: 60 से अधिक उम्र वालों में ग्लूकोमा का खतरा अधिक, क्या बच्चे भी हो सकते हैं इसका शिकार?

Mon, 11 Mar 2024 07:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 11 Mar 2024 07:31 PM IST
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ग्लूकोमा की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : iStock

ग्लूकोमा आंखों से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, इसे आमतौर पर उन बीमारियों के समूह के तौर पर देखा जाता है जो आंखों में मौजूद ऑप्टिक नर्व्स को क्षति पहुंचाती हैं। हमारी आंखें अति संवेदनशील अंगों में से एक हैं, इनमें होने वाली किसी भी तरह की समस्या का गंभीर दुष्प्रभाव होने का जोखिम रहता है। कुछ स्थितियों में आपकी आंखों पर बहुत अधिक दबाव होने लग जाता है, जिससे ऑप्टिक नर्व्स को क्षति पहुंच सकती है, ये स्थिति ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।   



ग्लूकोमा में आंखों के अंदर मौजूद तरल पदार्थ का दबाव धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और द्रव ठीक से बाहर भी नहीं निकल पाता है। ये द्रव एकत्रित होकर ऑप्टिक नर्व्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। हम आंखों से जो कुछ देखते हैं, ये नर्व्स उसका संकेत दिमाग को भेजती हैं, जिससे दिमाग में एक छवि बनती है। ग्लूकोमा के रोगियों में ये प्रक्रिया कठिन होती जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में ग्लूकोमा 60 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में होने वाली समस्या है, पर क्या ये कम उम्र के लोगों और बच्चों को भी प्रभावित कर सकती है?

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आंखों की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : iStock

ग्लूकोमा की समस्या छीन सकती है आंखों की रोशनी

ग्लूकोमा का जोखिम वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। आंखों की इस गंभीर बीमारी के बारे में लोगों को अलर्ट करने और बचाव के उपायों को सावधान करने के उद्देश्य से हर साल 12 मार्च को विश्व ग्लूकोमा दिवस मनाया जाता है।

डॉक्टर कहते हैं, ग्लूकोमा की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका उपचार न हो पाए तो ये अंधेपन का भी कारण बन सकती है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ग्लूकोमा की दिक्कत रही हो उनमें इसके जोखिम अधिक हो सकते हैं, ऐसे लोगों को बचाव को लेकर और अलर्ट रहने की आवश्यकता हो सकती है।

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बच्चों में आंखों की समस्या - फोटो : pixabay

बच्चे भी हो सकते हैं इस रोग का शिकार?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, 60 साल या फिर उम्र बढ़ने के साथ आंखों से संबंधित अन्य समस्याओं के साथ ग्लूकोमा होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। आंखों के अंदर तरल पदार्थों के उच्च दबाव के कारण किसी भी उम्र के व्यक्ति को ग्लूकोमा हो सकता है, बच्चे भी इससे प्रभावित देखे जाते रहे हैं। 

कुछ लोगों में जन्मजात ग्लूकोमा की समस्या भी हो सकती है, जिसके लक्षण जन्म से 3 वर्ष की आयु तक में देखे जा सकते हैं। आंखों में चोट या किसी प्रकार की सर्जरी के कारण भी कम उम्र में ग्लूकोमा की दिक्कतों के बढ़ने का खतरा रहता है। इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना सभी के लिए आवश्यक है।

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ग्लूकोमा की बीमारी - फोटो : iStock

ग्लूकोमा के लक्षणों के बारे में जानिए

ग्लूकोमा से पीड़ित अधिकांश लोगों को शुरुआत में कोई भी समस्या महसूस नहीं होती है, जब तक ये समस्या बहुत अधिक नहीं बढ़ जाती है तब तक इसके संकेत नहीं दिखते हैं। ग्लूकोमा के कारण ऑप्टिक तंत्रिका तंतु क्षतिग्रस्त होने लग जाते हैं, इसलिए छोटे-छोटे धब्बे विकसित होने शुरू हो सकते हैं। ग्लूकोमा के कारण धुंधला दिखाई देने से लेकर आंखों में तेज दर्द होने,  रोशनी के चारों तरफ इंद्रधनुष जैसा घेरा दिखने, जी मिचलाने-उल्टी की दिक्कत हो सकती है।

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ग्लूकोमा से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : Pixabay

बच्चों को इस समस्या से कैसे बचाएं?

बच्चो में ग्लूकोमा के उपचार के लिए सबसे पहले आंखों के भीतर बन रहे दबाव को कम करने के लिए प्रयास किए जाते हैं। इसके लिए आई ड्रॉप या अन्य दवाओं को प्रयोग में लाया जा सकता है। यदि दबाव अधिक है तो आंखों से तरल पदार्थ निकालने के लिए सर्जरी भी की जा सकती है। बच्चे के साथ सभी लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहने की सलाह दी जाती है, इससे समय रहते तंत्रिकाओं के दबाव का पता लगाने और आंखों में द्रव की स्थिति का अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है जिससे किसी गंभीर जोखिम को समय रहते कम किया जा सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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