World Diabetes Day 2024: डायबिटीज का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। अगर आप भी इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी मानते हैं तो सावधान हो जाइए, ये बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है। अक्सर ब्लड शुगर बढ़े रहने की ये बीमारी शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने लगती है। अगर ये अनियंत्रित बनी रहती है तो समय के साथ किडनी, आंख, पाचन और शरीर के कई अंगों के लिए दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
World Diabetes Day 2024: तीन नहीं चार टाइप की होती है डायबिटीज, इस तरह के मधुमेह से तो 90 फीसदी लोग अनजान
- अक्सर ब्लड शुगर बढ़े रहने की ये बीमारी शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने लगती है।
- वैसे तो टाइप-2 डायबिटीज के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं, पर क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के और भी कई प्रकार होते हैं?
टाइप-2 डायबिटीज
दुनियाभर में सबसे ज्यादा मरीज टाइप-2 डायबिटीज के हैं। साल 2021 में, दुनियाभर में 536.6 मिलियन (53.66 करोड़) वयस्कों को टाइप-2 डायबिटीज था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2045 तक यह दर बढ़कर 783.2 मिलियन (78.32 करोड़) हो सकती है।
ये इंसुलिन प्रतिरोध के रूप में शुरू होता है। वयस्कों में इस प्रकार के डायबिटीज के मामले काफी आम हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि आनुवांशिकी, गतिहीन जीवनशैली, अधिक वजन या मोटापा और कुछ पर्यावरणीय कारण भी इसका जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं। कुछ शोध बताते हैं कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें इस तरह के डायबिटीज के मामले अधिक हो सकते हैं। अगर इसे कंट्रोल रखने के लिए पर्याप्त उपाय न किए जाएं तो रोगियों को हर दिन इंसुलिन इंजेक्शन लेने की भी जरूरत हो सकती है।
टाइप-1 डायबिटीज
टाइप-1 डायबिटीज को लेकर भी काफी चर्चा रहती है। ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसका मतलब है कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ही गलती से अग्न्याशय में इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है। इस प्रकार की क्षति की स्थाई माना जाता है। आमतौर पर बचपन में ही इस समस्या का निदान हो जाता है।
टाइप-1 डायबिटीज क्यों होता है इसके कारण स्पष्ट नहीं हैं, पर विशेषज्ञ बताते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज की तरह इसमें जीवनशैली में गड़बड़ी जैसे कारकों की भूमिका नहीं होती है। इस प्रकार के रोगियों को ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए जीवनभर इंसुलिन या दवाएं लेनी पड़ सकती हैं।
गर्भकालीन मधुमेह
गर्भावधि मधुमेह, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इसका निदान पहली बार गर्भावस्था (गर्भावस्था) के दौरान होता है। मधुमेह के अन्य प्रकारों की तरह गर्भावधि मधुमेह भी सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करती है। गर्भावधि में मधुमेह के कारण ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहता है जिसका असर गर्भवती और बच्चे दोनों की सेहत पर देखा जाता है। ऐसी महिलाओं में बाद के समय में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
यही कारण है कि सभी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शुगर के स्तर पर ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है।
डायबिटीज 1.5 लाडा
उपरोक्त तीन प्रकार के डायबिटीज के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं पर डायबिटीज 1.5 जिसे लाडा के नाम से भी जाना जाता है, इसकी चर्चा सबसे कम होती है। यही कारण है कि अक्सर लोगों में इसका सही निदान भी नहीं हो पाता है।
लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट्स (LADA) (टाइप 1.5 डायबिटीज) में टाइप-1 और टाइप 2 दोनों तरह के डायबिटीज के लक्षण होते हैं। इसके लक्षण वयस्कता में शुरू होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं, जिससे अक्सर गलती से टाइप 2 का निदान हो जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि चार से 12% लोग जिनमें शुरू में टाइप-2 डायबिटीज का निदान होता है, असल में उनमें लाडा की समस्या हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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