World Cancer Day 2025: कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। इस बीमारी के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। भारत में भी कैंसर का जोखिम साल-दर-साल बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। ये बीमारी सभी उम्र और लिंग के लोगों को प्रभावित करती है, यहां तक कि बच्चे भी कैंसर का शिकार हो रहे हैं।
World Cancer Day: भारत में हर साल 15 लाख लोग हो रहे कैंसर का शिकार, 40% मामलों के लिए अकेले ये आदत जिम्मेदार
पिछले कुछ दशकों से कैंसर हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रमुख चुनौती बन गया है, जिसके मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। कैंसर के 40% मामलों के लिए अकेले इस एक आदत को जिम्मेदार बताया जा रहा है। आप भी सावधान हो जाइए।
कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट
दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, गतिहीन और सुस्त जीवनशैली के साथ-साथ खराब खान-पान के कारण, कैंसर बड़े पैमाने पर बुजुर्गों के अलावा अन्य आयु वर्ग वालों को भी अपना शिकार बना रहा है। प्रदूषण के बढ़ते जोखिमों ने इस रोग के खतरे को और भी बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो कैंसर के लिए कई चीजों को जिम्मेदार माना जा रहा है, हालांकि अकेले धूम्रपान की आदत देश में कैंसर के लगभग 40 प्रतिशत मामलों का प्रमुख कारण है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ रुचिर एम. शाह बताते हैं, गड़बड़ जीवनशैली, पर्यावरण की समस्याएं और अब भी लोगों में रोग को लेकर जागरूकता की कमी के कारण भारत में पांच में से एक पुरुष और आठ में से एक महिला को कैंसर होने का खतरा है।
भारत में तम्बाकू का सेवन (धूम्रपान या गुटखा) कैंसर के लिए सबसे प्रमुख कारण बना हुआ है, जो लगभग 40 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। अगर सिर्फ तंबाकू उत्पादों से ही दूरी बना ली जाए तो करीब 10 प्रकार के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तंबाकू उत्पाद और कैंसर का खतरा
डॉ रुचिर बताते हैं, तंबाकू का सेवन किसी भी रूप में खतरनाक है। तम्बाकू आपकी कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बनता है, जिससे कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर बन सकती हैं।
तम्बाकू (धूम्रपान) के धुएं में 5,000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें कम से कम 70 ऐसे होते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। ये रसायन डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। क्षतिग्रस्त डीएनए कोशिकाओं को असामान्य रूप से बढ़ने का कारण बन सकता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर कहते हैं, चिंताजनक बात ये भी है कि देश में बड़ी संख्या में युवा आबादी तंबाकू का सेवन करती है, जिसके कारण भविष्य में कैंसर के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने का आशंका जताई जा रही है।
इन कैंसर का बढ़ जाता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर तंबाकू और धूम्रपान को मुंह और फेफड़ों में होने वाले कैंसर के लिए ही जिम्मेदार माना जाता रहा है, पर ये आदत शरीर के अन्य अंगों में भी कैंसर बढ़ा सकती है। फेफड़ों में कैंसर के अलावा अध्ययनों में तंबाकू उत्पादों के कारण मुंह, गले, मूत्राशय, लिवर-किडनी, पेट और अग्न्याशय के अलावा महिलाओं में बढ़ते सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी देखा गया है।
इतना ही नहीं अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, पर सेकंडहैंड स्मोक (तम्बाकू के धुएं के संपर्क) का शिकार हैं तो इस आदत के कारण भी आप कैंसर का शिकार हो सकते हैं। मसलन यदि इस एक आदत से दूरी बना ली जाए तो भविष्य में कई प्रकार के कैंसर से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Tobacco and Cancer
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