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World Cancer Day: भारत में हर साल 15 लाख लोग हो रहे कैंसर का शिकार, 40% मामलों के लिए अकेले ये आदत जिम्मेदार

Tue, 04 Feb 2025 11:45 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 04 Feb 2025 11:45 AM IST
सार

पिछले कुछ दशकों से कैंसर हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रमुख चुनौती बन गया है, जिसके मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। कैंसर के 40% मामलों के लिए अकेले इस एक आदत को जिम्मेदार बताया जा रहा है। आप भी सावधान हो जाइए।

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विश्व कैंसर दिवस 2025 - फोटो : Adobe stock photos

World Cancer Day 2025: कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। इस बीमारी के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। भारत में भी कैंसर का जोखिम साल-दर-साल बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। ये बीमारी सभी उम्र और लिंग के लोगों को प्रभावित करती है, यहां तक कि बच्चे भी कैंसर का शिकार हो रहे हैं। 



मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिछले कुछ दशकों से कैंसर हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रमुख चुनौतियों में से एक बन गया है, जिसके मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। यह दुनियाभर में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने भारत में कैंसर के मामलों में 12% से 18% की वृद्धि होने का आशंका जताई है। भारत में कैंसर के मामले 2022 में 1.46 मिलियन (14.6 लाख) से बढ़कर 2025 में 1.57 मिलियन (15.7 लाख) होने का खतरा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इस गंभीर बीमारी के खतरे को समझते हुए कम उम्र से ही बचाव के उपाय शुरू कर देने चाहिए। दिनचर्या की कुछ गड़बड़ आदतों को कैंसर के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जा रहा है।

(ये भी पढ़िए- कहीं आपको भी तो नहीं है कैंसर? 'CAUTIONUS' फार्मूला से कर सकते हैं पता)

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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट

दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, गतिहीन और सुस्त जीवनशैली के साथ-साथ खराब खान-पान के कारण, कैंसर बड़े पैमाने पर बुजुर्गों के अलावा अन्य आयु वर्ग वालों को भी अपना शिकार बना रहा है। प्रदूषण के बढ़ते जोखिमों ने इस रोग के खतरे को और भी बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो कैंसर के लिए कई चीजों को जिम्मेदार माना जा रहा है, हालांकि अकेले धूम्रपान की आदत देश में कैंसर के लगभग 40 प्रतिशत मामलों का प्रमुख कारण है।

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तंबाकू-धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ रुचिर एम. शाह बताते हैं, गड़बड़ जीवनशैली, पर्यावरण की समस्याएं और अब भी लोगों में रोग को लेकर जागरूकता की कमी के कारण भारत में पांच में से एक पुरुष और आठ में से एक महिला को कैंसर होने का खतरा है।

भारत में तम्बाकू का सेवन (धूम्रपान या गुटखा) कैंसर के लिए सबसे प्रमुख कारण बना हुआ है, जो लगभग 40 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। अगर सिर्फ तंबाकू उत्पादों से ही दूरी बना ली जाए तो करीब 10 प्रकार के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

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कैंसर का खतरा और बचाव - फोटो : Adobe stock photos

तंबाकू उत्पाद और कैंसर का खतरा

डॉ रुचिर बताते हैं, तंबाकू का सेवन किसी भी रूप में खतरनाक है। तम्बाकू आपकी कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बनता है, जिससे कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर बन सकती हैं।

तम्बाकू (धूम्रपान) के धुएं में 5,000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें कम से कम 70 ऐसे होते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। ये रसायन डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। क्षतिग्रस्त डीएनए कोशिकाओं को असामान्य रूप से बढ़ने का कारण बन सकता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। 

डॉक्टर कहते हैं, चिंताजनक बात ये भी है कि देश में बड़ी संख्या में युवा आबादी तंबाकू का सेवन करती है, जिसके कारण भविष्य में कैंसर के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने का आशंका जताई जा रही है।

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फेफड़ों के कैंसर की समस्या - फोटो : Adobe stock

इन कैंसर का बढ़ जाता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर तंबाकू और धूम्रपान को मुंह और फेफड़ों में होने वाले कैंसर के लिए ही जिम्मेदार माना जाता रहा है, पर ये आदत शरीर के अन्य अंगों में भी कैंसर बढ़ा सकती है। फेफड़ों में कैंसर के अलावा अध्ययनों में तंबाकू उत्पादों के कारण मुंह, गले, मूत्राशय, लिवर-किडनी, पेट और अग्न्याशय के अलावा महिलाओं में बढ़ते सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी देखा गया है।

इतना ही नहीं अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, पर सेकंडहैंड स्मोक (तम्बाकू के धुएं के संपर्क) का शिकार हैं तो इस आदत के कारण भी आप कैंसर का शिकार हो सकते हैं। मसलन यदि इस एक आदत से दूरी बना ली जाए तो भविष्य में कई प्रकार के कैंसर से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Tobacco and Cancer


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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