कैंसर, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, हर साल तमाम प्रकार के कैंसर के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में पिछले एक दशक में ब्रेन कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि आई है। मस्तिष्क में कैंसरयुक्त असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि ट्यूमर का कारण बनती है जिससे ब्रेन कैंसर का खतरा हो सकता है। यह सबसे जानलेवा प्रकार के कैंसर में से एक है।
World Cancer Day 2024: बड़ी कामयाबी- दुनिया का पहला ब्लड टेस्ट जिससे कैंसर का हो सकेगा शीघ्र निदान
ब्रेन ट्यूमर का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट
वर्षों से, ब्रेन ट्यूमर का पता लगाना काफी कठिन प्रक्रिया रही है। हर साल दुनियाभर में हजारों लोगों को ये कैंसर प्रभावित करता है। अब इस कैंसर का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रकार का रक्त परीक्षण डिजाइन किया है जो अधिक तेजी से बीमारी का निदान करने में मदद कर सकती है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह परीक्षण "दुर्गम" मस्तिष्क ट्यूमर वाले रोगियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकती है, जिन्हें जल्द से जल्द इलाज शुरू करने से लाभ हो सकता है।
कई प्रकार के ब्रेन ट्यूमर का हो सकेगा निदान
इंपीरियल कॉलेज लंदन और इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट द्वारा संचालित ब्रेन ट्यूमर रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के शोधकर्ताओं ने पाया कि इस टेस्ट से ग्लियोब्लास्टोमा (जीबीएम) सहित ब्रेन ट्यूमर के अन्य कई प्रकारों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। जीबीएम मस्तिष्क का सबसे आम प्रकार का कैंसर है, वयस्कों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
कैसे काम करता है ये टेस्ट
वैज्ञानिक इस परीक्षण का वृहद स्तर पर अध्ययन कर रहे हैं और यदि ये सफल रहा तो रोगियों को दो वर्षों में इस नए परीक्षण का लाभ मिल सकता है।
ट्राइनेट्रा-ग्लियो नामक ये ब्लड टेस्ट, ग्लियाल कोशिकाओं की पहचान करने में मददगार है। ये कोशिकाएं ब्रेन ट्यूमर से निकली होती हैं और रक्त में तैरती रहती है। रक्त में इन कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप से पहचान की जा सकती है। इसका पाया जाना ये संकेत हो सकता है कि ब्रेन में ट्यूमर का विकास हो रहा है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
ब्रेन ट्यूमर रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का नेतृत्व करने वाली डॉ. नेलोफर सैयद कहती हैं, ब्रेन ट्यूमर का शीघ्र पता लगाने के लिए ये सस्ती विधि है जो रोगी के देखभाल में महत्वपूर्ण हो सकती है। अभी भी हमारे लिए कुछ रास्ता तय करना बाकी है, लेकिन यह उन लोगों के लिए काफी मददगार है जो ट्यूमर के स्थान या अन्य बाधाओं के कारण ब्रेन बायोप्सी नहीं करा सकते हैं।
शोधकर्ता कहते हैं, ब्रिटेन में किसी भी अन्य कैंसर की तुलना में ब्रेन ट्यूमर से 40 वर्ष से कम उम्र के अधिक लोगों की मौत होती है। अगर हम रोगियों में कैंसर का समय रहते पता लगा लेते हैं तो ये उनकी जान बचाने में काफी मददगार हो सकता है।
--------------
स्रोत और संदर्भ
Imperial research breakthrough could spare brain cancer patients risky surgery
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।