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World Cancer Day 2024: फेफड़ों के कैंसर-मौत के 80% मामलों के लिए ये है मुख्य वजह, आपकी भी तो नहीं है ऐसी आदत?

Sun, 04 Feb 2024 08:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 04 Feb 2024 08:04 PM IST
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धूम्रपान से फेफड़ों के कैंसर का खतरा - फोटो : iStock

कैंसर जानलेवा रोगों में से एक है, किसी भी उम्र के व्यक्ति में कैंसर का खतरा हो सकता है। खराब लाइफस्टाइल, रसायनों के अधिक संपर्क और खान-पान की गड़बड़ आदतों के कारण इसका जोखिम और भी तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है। जिन कैंसर के कारण पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा मौत के मामले दर्ज किए गए हैं, फेफड़ों का कैंसर उनमें से एक है। युवा आबादी में इस प्रकार के कैंसर का खतरा अधिक देखा जा रहा है। 



वैश्विक स्तर पर बढ़ते कैंसर के जोखिमों को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। विश्व कैंसर दिवस का इस साल का थीम है "क्लोज द केयर गैप" है।

फेफड़ों का कैंसर पुरुषों-महिलाओं दोनों में कैंसर से होने वाली मौतों का शीर्ष कारण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि हमारे लाइफस्टाइल की कुछ आदतें इसके जोखिमों को बढ़ा रही हैं, धूम्रपान उनमें सबसे प्रमुख है।

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धूम्रपान की आदत नुकसानदायक - फोटो : Pixabay

धूम्रपान से फेफड़ों के कैंसर का खतरा

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) विशेषज्ञ कहते हैं, फेफड़ों के कैंसर के लिए सिगरेट (धूम्रपान) प्रमुख जोखिम कारक है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, फेफड़ों के कैंसर से होने वाली लगभग 80-90% मौतों के लिए सिगरेट मुख्य कारण है।

तम्बाकू के धुआं में 7,000 से अधिक रसायनों का जहरीला मिश्रण होता है, जिससे न केवल फेफड़ों के क्षति पहुंचती है, साथ ही ये हृदय, मस्तिष्क, तंत्रिकाओं से संबंधित गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ाने वाली आदत भी हो सकती है। लंग्स कैंसर से बचने के लिए सिगरेट से बिल्कुल दूरी बनाना जरूरी है।

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धूम्रपान से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Pexels

धूम्रपान से कैंसर कैसे होता है?

कैंसर रिसर्च यूके की रिपोर्ट कहती है धूम्रपान कई प्रकार से कैंसर का कारण बनती है। यह सबसे पहले हमारी कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचाना शुरू करती है। डीएनए ही हमारी कोशिकाओं के विकास और कार्यों को नियंत्रित करता है। डीएनए में होने वाली क्षति के कारण कोशिकाएं असामान्य तरीके से परिवर्तित होने लगती हैं, और समय के साथ डीएनए क्षति के बढ़ने से कैंसर हो सकता है।

अध्ययनकर्ता बताते हैं, धूम्रपान को कभी भी छोड़ देना लाभकारी है। ये शरीर के लिए साइलेंट जहर जैसा हानिकारक माना जाता है।

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ध्रूमपान से फेफड़ों के क्षति का खतरा - फोटो : Getty Images

सेकेंडहैंड स्मोकिंग भी खतरनाक

सीडीसी विशेषज्ञों का कहना है, भले ही आप धूम्रपान नहीं करते हैं पर अगर ऐसे लोगों के सपर्क में रहते हैं जिनको धूम्रपान की आदत है तो भी आप कैंसर के शिकार हो सकते हैं। सेकेंडहैंड स्मोकिंग के कारण सिगरेट न पीने वालों में भी इस कैंसर का जोखिम हो सकता है। सेकेंडहैंड स्मोकिंग का मतलब तंबाकू उत्पादों को जलाने से निकलने वाले धुएं में सांस लेने से है।

सेकेंडहैंड स्मोकिंग भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा 20-30% तक बढ़ा सकती है। धूम्रपान न करने वाले अमेरिकी वयस्कों में हर साल सेकेंडहैंड स्मोकिंग के कारण फेफड़ों के कैंसर से 7,300 से अधिक मौतें होती हैं।

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तंबाकू उत्पाद से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Pixabay

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सिगरेट या कोई भी तंबाकू उत्पाद हमारे शरीर के लिए जहर जैसा है, इससे दूरी बनाना जरूरी है। अगर आप सिगरेट पीते हैं तो इसे अभी से छोड़ने का निर्णय लें।

कैंसर रिसर्च यूके के विशेषज्ञ कहते हैं यहां तक कि दिन में एक सिगरेट पीने से भी शरीर को गंभीर क्षति होने का खतरा हो सकता है। फेफड़ों के कैंसर से बचने के लिए लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखने और समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेते रहना भी जरूरी है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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