World Alzheimer's Day: उम्र बढ़ने के साथ कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं भी हमें घेरने लग जाती हैं। कमजोर होती इम्युनिटी के कारण जहां कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है वहीं 50 की उम्र के बाद आमतौर पर याददाश्त भी कमजोरी पड़ने लग जाती है।
World Alzheimer's Day 2025: डॉक्टर के इन दो नुस्खों से याददाश्त बनी रहेगी तेज, कभी नहीं भूलेंगे कोई बात
- विशेषज्ञ बताते हैं कि जीवनशैली, खानपान और दिमाग को सक्रिय रखने से याददाश्त को लंबे समय तक अच्छा रखा जा सकता है और अल्जाइमर से भी बचाव किया जा सकता है।
अल्जाइमर रोग में छोटी-छोटी बातें भूलने लगती हैं
अल्जाइमर दिमाग की एक बीमारी है जिसमें इंसान धीरे-धीरे बातों को भूलने लगता है। शुरुआत में छोटी-छोटी बातें भूलती हैं जैसे किसी का नाम, चीजें कहां रखी थीं या हाल की घटना। लेकिन समय के साथ यह भूलना इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति को अपने परिवार के लोग, जगह या रोज के काम भी याद नहीं रहते।
भूलने की बीमारी यानी अल्जाइमर-डिमेंशिया का खतरा 65 की उम्र से ज्यादा बढ़ने लगता है।
पुणे स्थित एक अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ निवेदिता भार्गवी कहती हैं, भारत में भी अल्जाइमर रोग के मामले बढ़ रहे हैं। इसे वैसे तो पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है हालांकि अगर लाइफस्टाइल और आहार में समय रहते कुछ बदलाव कर लिए जाएं तो इसके लक्षणों को देर या कम जरूर करने में मदद मिल सकती है। इसमें सबसे अहम है 'माइंड 'डाइट'। कई शोध बताते हैं कि इससे अल्जाइमर का खतरा 53% तक कम हो सकता है।
माइंड डाइट प्लान हो सकती है मददगार
डॉक्टर कहती हैं, आपकी थाली जितनी रंग-बिरंगी और पौष्टिकता वाली होगी, दिमाग उतना ही स्वस्थ और तेज रहेगा।
दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए माइंड डाइट (मेडिटेरेनियन डाइट और डैश) को सबसे अच्छा माना जाता है। इसमें ज्यादा सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, ओमेगा-3 से भरपूर मछली और ड्राई फ्रूट्स शामिल होते हैं।
- हरी पत्तेदार सब्जियों (पालक, मेथी, ब्रोकोली) में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-के होते हैं, जो न्यूरॉन्स को स्वस्थ रखते हैं।
- ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाती हैं और याददाश्त सुधारती हैं।
- अखरोट, अलसी, मछली जैसी चीजें ओमेगा-3 फैटी एसिड का स्रोत हैं जो ब्रेन सेल्स की झिल्ली को मजबूत करते हैं।
- हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन दिमाग में सूजन कम करके अल्जाइमर के खतरे को कम कर सकता है।
नींद और व्यायाम को भी दें प्राथमिकता
याददाश्त को ठीक रखने, अल्जाइमर रोग के खतरे को कम करने के लिए माइंड डाइट प्लान के साथ नींद और व्यायाम को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। इसके लिए रोजाना रात में पर्याप्त नींद (7–8 घंटे) जरूर लें। नींद के दौरान दिमाग पुराने टॉक्सिन्स साफ करता है और यादें स्टोर करता है।
इसी तरह नियमित व्यायाम जैसे योग, वॉक, साइकलिंग की आदत से दिमाग तक रक्त का संचार बढ़ाता है, जिससे न्यूरॉन्स को पोषण मिलता है। ध्यान और मेडिटेशन तनाव कम करके दिमाग को आराम देते हैं।
भूलने की समस्या से बचाव
डॉक्टर कहती हैं, बढ़ती उम्र में भूलने की समस्या सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो यह अल्जाइमर का रूप ले सकती है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया है कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, जो हफ्ते में चार बार एक्सरसाइज करते थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा एक्सरसाइज न करने वालों की तुलना में लगभग आधा हो जाता है। आहार को ठीक रखकर भी दिमाग को स्वस्थ रखना आसान होता है। तो कम उम्र से ही अच्छी आदतें बनाकर मस्तिष्क से संबंधित बढ़ती इस समस्या के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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