Health Awareness Alzheimer: अल्जाइमर रोग हमारे दिमाग की याददाश्त और कार्यक्षमता को धीरे-धीरे खत्म कर देता है, और यही वजह है कि इसे लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। यह एक बेहद जटिल बीमारी है, जिसको लेकर अक्सर कुछ लोगों के मन में भ्रम और कुछ गलत धारणाएं रहती हैं। कई मामलों में इन गलत धारणाओं पर विश्वास करना न केवल पीड़ित व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो सकता है, बल्कि उसके परिवार को भी सही देखभाल करने में मुश्किलें पैदा कर सकता है।
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World Alzheimer Day 2025: अल्जाइमर और डिमेंशिया क्या हैं अंतर? जानिए इस बीमारी से जुड़ी अफवाहों के बारे में
Sun, 21 Sep 2025 11:44 AM IST
शिखर बरनवाल
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Sun, 21 Sep 2025 11:44 AM IST
सार
हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। अल्जाइमर एक बेहद गंभीर बीमारी है, जिसको लेकर हमारे समाज में कुछ मिथक हैं। आइए इस लेख में चार सबसे प्रमुख मिथकों की सच्चाई के बारे में जानते हैं।
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विश्व अल्जाइमर दिवस 2025
- फोटो : Adobe Stock
विश्व अल्जाइमर दिवस 2025
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सिर्फ बुजुर्गों को होता है अल्जाइमर
यह सबसे आम धारणाओं में से एक है कि अल्जाइमर केवल 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होता है। यह सच है कि उम्र एक बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन अल्जाइमर कम उम्र के लोगों में भी हो सकता है। इसे 'यंग ऑनसेट अल्जाइमर' कहते हैं, जिसमें 30, 40 या 50 साल की उम्र के लोगों में भी इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ऐसे मामले दुर्लभ होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह केवल बुजुर्गों की बीमारी है।
यह सबसे आम धारणाओं में से एक है कि अल्जाइमर केवल 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होता है। यह सच है कि उम्र एक बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन अल्जाइमर कम उम्र के लोगों में भी हो सकता है। इसे 'यंग ऑनसेट अल्जाइमर' कहते हैं, जिसमें 30, 40 या 50 साल की उम्र के लोगों में भी इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ऐसे मामले दुर्लभ होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह केवल बुजुर्गों की बीमारी है।
विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : Adobe Stock
अल्जाइमर और डिमेंशिया एक ही हैं
लोग अक्सर अल्जाइमर और डिमेंशिया को एक ही मानते हैं, लेकिन यह गलत है। डिमेंशिया एक सामान्य शब्द है जो याददाश्त, सोचने और तर्क करने की क्षमता में गिरावट को दर्शाता है। यह कई बीमारियों के कारण हो सकता है। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, जो लगभग 60-80% मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसलिए हर अल्जाइमर रोगी को डिमेंशिया होता है, लेकिन हर डिमेंशिया रोगी को अल्जाइमर नहीं होता।
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लोग अक्सर अल्जाइमर और डिमेंशिया को एक ही मानते हैं, लेकिन यह गलत है। डिमेंशिया एक सामान्य शब्द है जो याददाश्त, सोचने और तर्क करने की क्षमता में गिरावट को दर्शाता है। यह कई बीमारियों के कारण हो सकता है। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, जो लगभग 60-80% मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसलिए हर अल्जाइमर रोगी को डिमेंशिया होता है, लेकिन हर डिमेंशिया रोगी को अल्जाइमर नहीं होता।
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विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : Adobe Stock
अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है
यह सच है कि अभी तक अल्जाइमर का कोई संपूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका कोई प्रबंधन संभव नहीं है। दवाएं और थेरेपी रोग की प्रगति को धीमा करने और लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। सही देखभाल मानसिक व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली से रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए 'इलाज नहीं' का मतलब 'उम्मीद नहीं' नहीं है।
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यह सच है कि अभी तक अल्जाइमर का कोई संपूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका कोई प्रबंधन संभव नहीं है। दवाएं और थेरेपी रोग की प्रगति को धीमा करने और लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। सही देखभाल मानसिक व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली से रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए 'इलाज नहीं' का मतलब 'उम्मीद नहीं' नहीं है।
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अल्जाइमर
- फोटो : Freepik.com
यह सिर्फ याददाश्त खोने की समस्या है
अल्जाइमर रोग केवल याददाश्त के नुकसान तक सीमित नहीं है। यह सोचने की क्षमता, तर्क, निर्णय लेने, भाषा और व्यवहार को भी प्रभावित करता है। रोगी अपनी दिनचर्या के साधारण काम भी नहीं कर पाता। समय के साथ, उन्हें बोलने और निगलने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए अल्जाइमर को सिर्फ 'भूलने की बीमारी' समझना एक अधूरा सच है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि अल्जाइमर एक जटिल बीमारी है और इसके बारे में सही जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है। अफवाहों पर ध्यान न देकर, हमें विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए और रोगी को उचित देखभाल देनी चाहिए।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
अल्जाइमर रोग केवल याददाश्त के नुकसान तक सीमित नहीं है। यह सोचने की क्षमता, तर्क, निर्णय लेने, भाषा और व्यवहार को भी प्रभावित करता है। रोगी अपनी दिनचर्या के साधारण काम भी नहीं कर पाता। समय के साथ, उन्हें बोलने और निगलने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए अल्जाइमर को सिर्फ 'भूलने की बीमारी' समझना एक अधूरा सच है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि अल्जाइमर एक जटिल बीमारी है और इसके बारे में सही जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है। अफवाहों पर ध्यान न देकर, हमें विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए और रोगी को उचित देखभाल देनी चाहिए।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।