Fasting Preparation Guide: नवरात्रि का पावन पर्व 9 दिनों का व्रत केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर को डिटॉक्सिफाई करने का भी एक अच्छा तरीका है। यह व्रत भले ही हमारी श्रद्धा का प्रतीक हो, लेकिन इसे सही तरीके से न किया जाए तो हमारे सेहत पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। अक्सर कुछ लोग व्रत शुरू होने के दिन ही अपनी खान-पान की आदतों को अचानक बदल देते हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा और पोषक तत्वों की कमी का सामना करना पड़ता है।
Health Tips: नवरात्रि में रहना है 9 दिन का व्रत तो अभी से शुरू कर दें ये तैयारियां, डॉक्टर ने दिया सुझाव
नवरात्रि में 9 दिनों का व्रत रखना अपने आप में ये श्रद्धा का विषय है लेकिन कई मायनों में यह आपके सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। डॉक्टर सुझाव देते हैं कि नवरात्रि में 9 दिन का व्रत रखने से पहले अपनी डाइट में कुछ बदलाव जरूर करना चाहिए। आइए उसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
व्रत से 20 दिन पहले शुरू करें ये तैयारी
डॉ. मल्हार के अनुसार, 9 दिन के व्रत के लिए शरीर को पहले से ही 'टॉप-अप' करना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले 20 दिनों में विटामिन डी, कैल्शियम, आयरन और विटामिन बी12 जैसे जरूरी मल्टीविटामिन लेकर शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया है।
इन विटामिन्स और मिनरल्स का सही स्तर शरीर को व्रत के दौरान कमजोर होने से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि व्रत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी न हो।
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व्रत की तैयारी के लिए सबसे बड़ा बदलाव खाने की आदतों में लाना होता है। डॉ. मल्हार ने बताया कि उन्होंने धीरे-धीरे बाहर का खाना पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिसमें चीनी और चटनी जैसी चीजें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उनका मकसद शरीर को सादे और बेसिक खाने पर लाना है, ताकि व्रत के दौरान शरीर को आसानी से इन बदलावों को स्वीकार करने में मदद मिल सके। यह कदम न सिर्फ व्रत के लिए, बल्कि लंबी समय के लिए भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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डॉ. मल्हार ने एक दिलचस्प बात बताई कि हमारे भोजन में नमक, तेल और चीनी की अधिक मात्रा हमारे स्वाद को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि सादा खाना शुरू करने से इन चीजों के बिना भी साधारण भोजन का असली स्वाद महसूस होने लगता है।
उन्होंने उबले हुए स्प्राउट्स का उदाहरण दिया और कहा कि हम उस प्राकृतिक स्वाद को भूल गए हैं, क्योंकि हमें हर चीज में मसाले और चटनी की आदत हो गई है। व्रत के दौरान जब आप सादा भोजन करते हैं, तो आपका 'टेस्ट रिसेप्टर' पूरी तरह से रिसेट हो जाता है।
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डॉ. मल्हार का मानना है कि यह प्रक्रिया सिर्फ नवरात्रि के व्रत के लिए ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी है। यह हमें सादे और प्राकृतिक भोजन के असली स्वाद का अनुभव कराती है और शरीर को अनावश्यक फैट और शुगर से बचाती है।
व्रत के दौरान यह अभ्यास हमारे पाचन तंत्र को भी आराम देता है और शरीर की आंतरिक सफाई में मदद करता है। इसलिए नवरात्रि के व्रत को केवल धार्मिक अनुष्ठान न मानकर, इसे अपने शरीर को स्वस्थ और डिटॉक्सिफाई करने का एक मौका समझना चाहिए।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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