उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस मौसम में सर्दी-जुकाम की समस्या तो खूब होती ही है, इसके साथ ही एक और समस्या है जिसकी संभावना काफी बढ़ जाती है, जिसका नाम 'चिल ब्लेन' है। यह कोई नई बीमारी नहीं है, बल्कि सर्दियों के मौसम में यह अक्सर लोगों को होती ही है। खासतौर पर यह बीमारी उन महिलाओं को होती है, जिन्हें ठंड में काम करना पड़ता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी एक वीडियो भी जारी कर इस बारे में जानकारी दी है और लोगों को इस बीमारी से बचने की सलाह दी है।
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ठंड में बढ़ जाता है 'चिल ब्लेन' का खतरा, जानिए इसके लक्षण और बचाव के उपाय
Fri, 01 Jan 2021 03:48 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 01 Jan 2021 03:48 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
आखिर ये चिल ब्लेन है क्या?
- दरअसल, इस बीमारी में लोगों के हाथ और पैर की उंगलियां और कान का निचला हिस्सा लाल होकर सूज जाता है। इससे तेज खुजली, गर्माहट या जलन महसूस होती है। कई बार तो खुजलाने की वजह से उन अंगों पर जख्म भी बन जाता है। इससे 'स्किन कैंसर' का खतरा हो सकता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
चिल ब्लेन की वजह क्या है?
- जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उन्हें तेज ठंड के बाद जब अचानक से बहुत ज्यादा गर्माहट मिलती है या गर्मी से अचानक तेज ठंड में जाते हैं, तो चिल ब्लेन की समस्या हो सकती है। यह समस्या सबसे ज्यादा दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में देखने को मिलती है, क्योंकि इस दौरान ठंड काफी ज्यादा पड़ती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
चिल ब्लेन होने पर क्या करें और क्या न करें?
- अगर चिल ब्लेन के लक्षण आपमें नजर आएं, यानी तेज खुजली हो तो उस जगह को नाखून से खुजलाने के बजाय कपड़े से आराम से सहलाएं। चिल ब्लेन की समस्या होने पर शरीर के उस हिस्से को आग के पास बैठकर गर्म ना करें। इससे आपकी दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। इससे राहत पाने के लिए आप गर्म पानी में थोड़ा सा नमक डालकर उससे हाथ और पैरों की सिंकाई करें। अगर ज्यादा तकलीफ है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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- फोटो : iStock
चिल ब्लेन से बचने के लिए क्या करें?
- जितना हो सके ठंड से बचें और अगर बहुत आवश्यक न हो तो घर से बाहर न निकलें। घर में भी मोजे पहन कर रहें और हाथों में दस्ताने पहनें। हाथों और पैरों को ठंडे पानी से बचाकर रखें। अगर बर्तन भी धोने हैं तो गर्म पानी का इस्तेमाल करें।