शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें रोजाना ऐसे खान-पान की जरूरत होती है जिससे आवश्यक अधिकतर पोषक तत्वों की पूर्ति हो सके। कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि अगर हम सभी सिर्फ खान-पान को ही ठीक रख लें तो इससे कई बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
सेहत की बात: कम उम्र वालों में क्यों बढ़ रही है विटामिन-डी की कमी? क्या है इसका डाइट और लाइफस्टाइल से कनेक्शन
कम उम्र में विटामिन-डी का स्तर कम होने के पीछे इनडोर लाइफस्टाइल, डाइट में विटामिन-डी के कम स्रोत, शरीर की चर्बी और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। विटामिन-डी कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है।
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युवाओं में विटामिन-डी की कमी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विटामिन-डी का नाम आते ही सबसे पहले धूप याद आती है। लेकिन आज की जीवनशैली में धूप से दूरी, घर और ऑफिस के अंदर ज्यादा समय बिताना और डाइट में विटामिन-डी वाली चीजों की कमी लोगों के लिए खतरा बढ़ाती जा रही है।
- शरीर विटामिन-डी बनाने के लिए सूर्य की किरणों का इस्तेमाल करता है। लेकिन शहरी आबादी में लोगों को धूप कम मिल पाता है, क्योंकि ज्यादातर लोगों के दिन का समय स्कूल-कॉलेज और ऑफिस के भीतर बीत जाता है।
- इसके अलावा सनस्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल और बाहर कम रहना भी लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है।
डाइट भी समस्या
अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन-डी के लिए डाइट पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। भोजन से पर्याप्त विटामिन-डी पाना आसान नहीं होता क्योंकि प्राकृतिक रूप से यह बहुत कम खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
- फैटी फिश, अंडे की जर्दी, चीज और कुछ फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों में ये थोड़ी मात्रा में होता है।
- चूंकि विटामिन-डी वाली चीजें पहले से सीमित हैं, इसलिए यदि डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं और ऐसे खाद्य पदार्थ नियमित रूप से नहीं लेते तो भोजन से पर्याप्त विटामिन-डी मिलना मुश्किल हो सकता है।
किन लोगों में कमी का जोखिम ज्यादा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जिन लोगों को रोजाना पर्याप्त मात्रा में धूप नहीं मिल पाती है या फिर जिनके त्वचा का रंग गहरा है उनमें विटामिन-डी की कमी का खतरा हो सकता है।
- इसके अलावा शरीर में फैट ज्यादा होने वाले और कुछ ऐसी बीमारियां जिनमें शरीर विटामिन को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, उनमें विटामिन-डी की कमी का जोखिम अधिक हो सकता है।
- उम्र बढ़ने के साथ भी त्वचा की विटामिन-डी बनाने की क्षमता घटती है।
विटामिन-डी की कमी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों के अनुसार 20 ng/mL या उससे ऊपर का स्तर अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त माना जाता है, जबकि 12 ng/mL से कम को बहुत कम माना जाता है। जिन लोगों में इस विटामिन की ज्यादा कमी होती है, उन्हें डॉक्टर कुछ सप्लीमेंट्स दे सकते हैं, हालांकि कभी भी खुद से सप्लीमेंट्स नहीं लेना चाहिए।
बहुत ज्यादा विटामिन-डी लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।