पीरियड से जुड़े बहुत सारे भ्रम समाज में हैं। जिसका खामियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ता है। महिलाओं की इसी समस्या को दूर करने और लोगों में जागरुकता लाने के लिए रेड डॉट चैलेंज सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से चल रहा है। जिसमें बहुत सारे सितारे और सोशल एक्टीविस्ट भाग ले रहे हैं। ये सितारे हाथों पर लाल बिंदी बनाकर अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। इस मुहिम में साथ देने के लिए दीया मिर्जा, अदिति राव हैदरी, डायना पैंटी जैसी अभिनेत्रियों ने हिस्सा लिया है।
World Menstrual Hygiene Day: सोशल मीडिया चैलेंज से जागरूकता का प्रयास, पीरियड से जुड़े भ्रम को दूर कर रहे ये सितारे
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इस चैलेंज को UNICEF ने शुरू किया है, जिसका उद्देश्य world menstrual hygiene day पर पीरियड से जुड़े भ्रम और शर्म को दूर करना है। क्योंकि समाज में आज भी महिलाओं के जीवन चक्र से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर बात करने में लोगों को झिझक महसूस होती है। आज भी महिलाएं अपने माहवारी से जुड़ी दिक्कतों और परेशानियों को खुलकर साझा नहीं कर सकतीं। जिसका नतीजा उनकी खराब सेहत के रूप में सामने आता है।
इस चैलेंज को शुरू करने का उद्देशय है कि महिलाओं के इस मुद्दे पर खुलकर बोला जाए। और लोगों को बताया जाए कि पीरियड्स के दौरान ऐसे पैड का इस्तेमाल किया जाए जो बायो ग्रेडेबल हो। महिलाओं को मैंस्ट्रुअल कप को इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी देना। क्योंकि आज भी बहुत सारे देशों में और भारत में महिलाएं पीरियड के दिनों में पैड तक इस्तेमाल करने के लिए नहीं पाती है। इसलिए जरूरत है कि लोगों को खुलकर इस बारे में बात करनी चाहिए ताकि महिलाओं को ये सारी जरूरत की चीजें आसानी से मुहैया हो सकें।
महिलाओं के इस मुद्दे पर शुरू रेड डॉट चैलेंज को पूरा करने वाली सोशल एक्टीविस्ट ने कैप्शन में अपनी भावनाओं को भी लिखा है। एक्ट्रैस कुब्रा सैत लिखती हैं दो महीनों तक लगातार घर बैठने से उन्हें आराम का मतलब पता चला। वो बताती हैं कि पीरियड्स के दिनों में खूब पानी पीना और शरीर को आराम देना जरूरी है।
वहीं एक्ट्रेस डायना पैंटी लिखती हैं कि जरूरत है कि अब पीरियड से जुड़ी शर्म को दूर किया जाए। दिया मिर्जा जो एक सोशल एक्टीविस्ट भी बन चुकी हैं वो इस बारे में खुलकर बोलती हैं। और बताती हैं कि वो बायो डिग्रेडेबल पैड का इस्तेमाल करती हैं और बहुत सारी महिलाएं मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करने लगी हैं। उनका कहना है कि ये जरूरी है कि लोगों तक इस तरह की प्रोडक्ट की पहुंच हो।