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Health Risk युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हिप रिप्लेसमेंट के मामले? कहीं आपको भी तो नहीं है खतरा

Mon, 15 Jun 2026 07:53 PM IST
Abhilash Srivastava यासमीन सिद्दीकी, अमर उजाला, नई दिल्ली
यासमीन सिद्दीकी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 15 Jun 2026 07:53 PM IST
सार

हिप रिप्लेसमेंट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें कूल्हे (हिप) के खराब या घिस चुके जोड़ को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम जोड़ लगाया जाता है। अब कम उम्र के लोगों को भी इसकी जरूरत पड़ रही है।

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बढ़ते हिप रिप्लेसमेंट के केस - फोटो : Freepik.com

हिप रिप्लेसमेंट अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। कोविड के बाद युवाओं में बढ़ा इसका खतरा; जानिए कैसे खराब लाइफस्टाइल और स्टेरॉयड दे रहे हैं इसे बढ़ावा।



आज के समय में अव्यवस्थित जीवनशैली और पर्यावरण के बदलते मिजाज के कारण हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। खराब दिनचर्या और शारीरिक निष्क्रियता सीधे तौर पर मोटापे को निमंत्रण देती है, जिससे कई तरह की बीमारियों समेत हड्डियों से जुड़ी परेशानियां तेजी से उभर रही हैं।

हिप रिप्लेसमेंट एक ऐसी ही समस्या है, जो अब तेजी से युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही है।

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हिप रिप्लेसमेंट के मामले - फोटो : Freepik.com

क्या है हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी?

हिप रिप्लेसमेंट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें कूल्हे (हिप) के खराब या घिस चुके जोड़ को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम जोड़ लगाया जाता है।
 

  • इस समस्या में जोड़ों के बीच का कार्टिलेज घिस जाता है, जिससे उठने-बैठने या चलने पर कूल्हे में गंभीर जकड़न और असहनीय दर्द होता है।
  • यह स्थिति आमतौर पर गंभीर आर्थराइटिस (गठिया), गहरी चोट, फ्रैक्चर या लंबे समय तक रहने वाले दर्द के कारण बनती है।
  • यदि आप इस गंभीर स्थिति से बचना चाहते हैं, तो सबसे पहले शरीर को एक्टिव रखें और वजन को नियंत्रित करें।
  • अधिक वजन का सबसे पहला और सीधा दबाव हमारे कूल्हे और घुटनों के जोड़ों पर ही पड़ता है।
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हिप रिप्लेसमेंट - फोटो : Freepik.com

 जॉइंट्स का लचीलापन  बनाए रखना क्यों है जरूरी?

यदि आप स्पोर्ट्स या हैवी वर्कआउट के शौकीन हैं, तो जोड़ों की सुरक्षा के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • कोई भी खेल शुरू करने से पहले कम से कम 10 मिनट का वॉर्म-अप जरूर करें और हमेशा सही स्पोर्ट्स शूज पहनें।
  • रनिंग, जंपिंग या वेट लिफ्टिंग करते समय आपका पॉश्चर (ठहराव और मुद्रा) बिल्कुल सही होना चाहिए। गलत पॉश्चर जोड़ों पर अचानक दबाव बढ़ाता है।
  • वर्कआउट जरूर करें, लेकिन शरीर की क्षमता से बाहर जाकर खुद को पुश न करें। यदि फुटबॉल या बास्केटबॉल जैसे हाई-इम्पैक्ट खेलों से हिप बोन में दर्द हो रहा है, तो कुछ समय के लिए हल्के स्पोर्ट्स (जैसे साइक्लिंग या स्विमिंग) अपनाएं।
  • नियमित खेलने या वर्कआउट करने वाले लोग हेमस्ट्रिंग, क्वाड्स और हिप मसल्स की स्ट्रेचिंग जरूर करें। इससे जॉइंट्स का लचीलापन बढ़ता है और चोट लगने की संभावना कम होती है।
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आहार में करें सुधार - फोटो : Freepik.com

मजबूत हड्डियों के लिए 'सही पोषण' का फॉर्मूला

हड्डियों को अंदर से फौलादी बनाए रखने के लिए अपनी डाइट में सुधार करें।
 

  • कैल्शियम के भरपूर चीजें जैसे दूध, दही, पनीर और हरी पत्तेदार सब्जियां नियमित खाएं। रागी कैल्शियम का एक बेहतरीन पारंपरिक स्रोत है, इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
  • विटामिन डी और धूप भी जरूरी है। सुबह की गुनगुनी धूप विटामिन डी का सबसे अच्छा और नेचुरल सोर्स है, जो हड्डियों में कैल्शियम को एब्जॉर्ब करने के लिए जरूरी है।
  • हड्डियों और टिश्यूज की मरम्मत के लिए प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाएं।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। पानी जोड़ों में जरूरी नमी और चिकनाई (Lubrication) बनाए रखता है, जिससे घर्षण कम होता है।



क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कौशल कांत मिश्रा कहते हैं, कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में कम उम्र के मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। इसका सबसे बड़ा कारण कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान स्टेरॉयड का अत्यधिक उपयोग रहा।

दरअसल, स्टेरॉयड के कारण कूल्हे की हड्डी (फेमोरल हेड) तक होने वाला ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) बाधित या कम हो जाता है। इस मेडिकल कंडीशन को एवैस्कुलर नेक्रोसिस कहा जाता है। इसमें हड्डी अंदर से सूखने, कमजोर होने और क्षतिग्रस्त होने लगती है, जो आगे चलकर हिप आर्थराइटिस और हिप रिप्लेसमेंट का मुख्य कारण बनती है। इससे बचाव के लिए युवाओं को नियमित साइक्लिंग, जॉगिंग, टहलना और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए ताकि जोड़ों में रक्त का प्रवाह बेहतर बना रहे।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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