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सलाह: बच्चियों को मासिक धर्म के बारे में करें जागरूक, ताकि सेहत से न हो कोई समझौता

Thu, 21 Oct 2021 11:11 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 21 Oct 2021 11:11 AM IST
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why educating girls about period is important
मासिक धर्म के बारे में बच्चियों को करें जागरूक - फोटो : Pixabay

महिलाओं के जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है-पीरियड्स। एक ऐसी प्रक्रिया जिसके बारे में जानते हुए भी इसे छुपाया जाता है, इसके बारे में बात करने से हिचकिचाया जाता है। जबकि पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने की जरूरत है, खासकर तब जब किशोरियों में इस प्रक्रिया की शुरुआत हो। पहली बार पीरियड्स के होने पर बच्चियों के मन में घबराहट, असमंजस, डर और चिंता भी उपजती है। इस समय होने वाला असंतुलन उन्हें और भी डरा देता है क्योंकि वे इसके बारे में कम जानती हैं। ऐसे में उन्हें सही और उचित जानकारी देना न केवल इस प्राकृतिक प्रक्रिया को लेकर उनके मन से असमंजस को हटा देता है, बल्कि उसे पीरियड्स के दौरान सामान्य जीवन जीने में भी मदद करता है।



ऐसी कई स्थितियां हैं जो पहली बार पीरियड्स शुरू होने के बाद बनती हैं और जिनके बारे में सही जानकारी किशोरियों तक पहुंचानी आवश्यक हैं। यह जानकारी उन्हें उनकी माँ, टीचर, बड़ी बहन या घर की कोई भी महिला दे सकती है। 

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पीरियड्स के बारे में दें सही पूरी जानकारी - फोटो : Pixabay

बच्चियों को पीरियड्स के बारे में दें जानकारी
आजकल कई कारणों से बच्चियों में पीरियड्स के आने की उम्र पीछे खिसक कर 10-11 वर्ष तक आ गई है। पहले यह उम्र 13- 16 वर्ष तक भी हुआ करती थी। जाहिर है कि कम उम्र में पीरियड्स का आना बच्चियों के सामान्य रूटीन में हलचल तो पैदा करता है। कम उम्र में यह बच्चियों को बंधन जैसा भी लग सकता है। उसपर दर्द, असहजता, मूड स्विंग्स आदि और परेशानी पैदा कर सकते हैं लेकिन यही वह महत्वपूर्ण समय होता है जब उनको हेल्थ, फिटनेस और आने वाले समय के लिए मजबूत शरीर तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कुछ पॉइंट्स इस मामले में आपकी मदद कर सकते हैं।

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मासिक धर्म को लेकर जागरूकता आवश्यक - फोटो : Pixabay

पीरियड्स के बारे में किशोरियों को दें जरूरी सलाह

  • सबसे पहले तो बच्ची को पीरियड्स के बारे में सामान्य जानकारी दें। जैसे कि ये क्या है, किस समय शुरू होता है, इसके लिए क्या तैयारी होनी चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात- पीरियड्स शर्माने या छुपाने की बात नहीं हैं।
  • शुरुआत में पहले पीरियड से दूसरी बार पीरियड के आने के बीच के समय में कई बार अनियमितता हो सकती है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं, यह चीज बच्ची को बताएं। सबसे पहले पीरियड और उसके एकदम बाद के दूसरे पीरियड के बीच में कई बार 2-6 माह तक का अन्तर भी हो सकता है, जैसा कि मीनोपॉज के दौरान होता है। सामान्यतौर पर 35-40 दिन के भीतर दूसरा पीरियड आ जाता है। ऐसी बच्चियों का प्रतिशत 8-10 प्रतिशत तक होता है जिनमें दिनों का अंतर 2 महीने या इससे ज्यादा का हो सकता है। विशेषज्ञ इसे भी नॉर्मल मानते हैं लेकिन अगर दूसरे पीरियड में यह अंतर 3 महीने से ज्यादा का टाइम ले तो एक बार किसी स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
  • बच्ची का मासिक चक्र समय पर रहे तो कोई समस्या नहीं लेकिन अगर कई बार पीरियड्स में लम्बा गैप होने या इसके असंतुलित होने के पीछे बॉडी मास इंडेक्स, स्ट्रेस या एंग्जायटी, थाइरॉइड डिजीज, पीसीओएस जैसी स्थितियां भी हो सकती हैं। इसलिए यदि असंतुलन हो तो तुरन्त डॉक्टर से बात करें।  
  • पीरियड्स को लेकर हर टीनएजर का अनुभव अलग हो सकता है। किसी को इसके होने से बहुत ज्यादा तकलीफ हो सकती है जैसे पेट दर्द, उल्टी, घबराहट, डायरिया, एक्ने, बदन दर्द आदि, जबकि कुछ लोगों के लिए यह एकदम सामान्य होता है।
  • अगर पहली बार के बाद लगातार तीन-चार बार ज्यादा ब्लीडिंग हो कमजोरी महसूस हो, पेट-दर्द, उल्टी जैसी तकलीफें दिखें तो भी डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। सबसे खास बात यह कि बिना डॉक्टर की सलाह के पेट दर्द की गोली न लें।
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पीरियड्स में खान-पान का रखें विशेष ध्यान - फोटो : iStock

ताकि सहेत से न हो खिलवाड़

  • पीरियड्स मतलब बीमारी नहीं है, इस बात को शुरू से बच्ची को समझाएं। कई बार शुरुआत में ज्यादा ब्लीडिंग के बाद धीरे धीरे चक्र नियमित और सामान्य होने लगता है। इस दौरान बच्ची को लगातार काउंसिल करती रहें।
  • टीनएज लड़के-लड़कियों दोनों में हार्मोनल परिवर्तन तेजी से हो रहे होते हैं। इनके कारण वे अपने शरीर को लेकर कई सवालों से घिरे रहते हैं। ऐसे में पीरियड्स के आना जो कि इन्हीं परिवर्तनों का हिस्सा होता है, बच्चियों के मन पर भी असर डालता है। इसलिए उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति को समझें और उसके हिसाब से उन्हें सलाह दें। जैसे पेट दर्द के लिए गर्म पानी की थैली से सेकाई या हॉट चॉकलेट, हल्दी दूध आदि का सेवन करने की सलाह या अपने मन की बात शेयर करने की सलाह।  
  • पीरियड्स के दौरान शरीर को और भी पौष्टिक खुराक की जरूरत होती है। ताजा भोजन, हरी सब्जियां, फल, दूध, ताजा दही, अंडे, सूखे मेवे इस समय शरीर को ताकत देते हैं, साथ ही भरपूर पानी पीते रहना भी जरूरी होता। इस दौरान बच्चियों को बहुत ज्यादा मीठा, तला- गला, मैदा युक्त तथा बहुत मिर्च-मसालेयुक्त खाद्य से बचने की सलाह देनी चाहिए।



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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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