जब भी बात हेल्दी खान-पान की होती है तो डाइट में फलों और सब्जियों को शामिल करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है। फलों से शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। अब ऐसे में सवाल ये है कि फल खाएं या फलों के जूस का सेवन करें? कौन सा ज्यादा लाभकारी है?
हेल्दी डाइट: फल खाना बेहतर या जूस पीना, किससे मिलता है शरीर को ज्यादा फायदा? यहां जानिए
साबुत फल में फाइबर मौजूद रहता है, इसलिए इसे जूस की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है। 100 प्रतिशत रियल के नाम से जूस में भी प्राकृतिक चीनी होती है, जबकि कई पैक्ड फ्रूट ड्रिंक में अतिरिक्त चीनी हो सकती है। लेबल जरूर पढ़ें।
फाइबर चाहिए तो साबुत फल
संतरा, सेब, अमरूद या दूसरे फलों को साबुत खाने से फाइबर का की मात्रा अधिक मिलती है। जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर काफी कम हो जाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ साबुत फल को प्राथमिकता देते हैं। जूस की तुलना में साबुत फल खाने में ज्यादा समय लगता है और वह पेट भरने में भी ज्यादा मदद कर सकता है।
- यह समझना जरूरी है कि 100 प्रतिशत रियल जूस के नाम से मिलने वाले पैक्ड जूस में चीनी ज्यादा होती है। समस्या तब बढ़ जाती है जब आप साबुत फलों की जगह जूस ज्यादा पीते हैं।
- अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक एक से तीन साल के बच्चों के लिए फलों का पैक्ड जूस बिल्कुल भी नहीं दिया जाना चाहिए।
पैक्ड जूस के इन खतरों को भी जानिए
- बाजार में मिलने वाला हर 'फ्रूट जूस' 100 प्रतिशत जूस नहीं होता। इनमें अतिरिक्त चीनी और मिठास के अलावा जूस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव्स भी मिलाया जाता है। इसलिए बाजार से जूस लेते समय पैकेट पर लिखे पोषण लेबल और सामग्री की सूची जरूरी देखें।
दांतों के लिए भी ज्यादा जूस ठीक नहीं
मीठे पेय या फिर पैक्ड जूस को लंबे समय तक थोड़ा-थोड़ा पीते रहने से दांतों पर शुगर का संपर्क बढ़ता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार जूस को लगातार घूंट-घूंट करके पीना दांतों की सड़न का खतरा बढ़ा सकता है। जूस में मौजूद चीनी की मात्रा लंबे समय में शरीर में कैलोरी को भी बढ़ाने वाली हो सकती है, जिससे मोटापा और डायबिटीज का खतरा भी हो सकता है जिसे लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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