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Study: दुनियाभर में 40% लोग न्यूरोलॉजिकल रोगों का शिकार, इस बीमारी को लेकर WHO सबसे ज्यादा चिंतित

Sun, 19 Oct 2025 07:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 19 Oct 2025 07:24 PM IST
सार

  •  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई रिपोर्ट ने एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट पर रोशनी डाली है। दुनिया की करीब 40% आबादी यानी 3 अरब से अधिक लोग किसी न किसी तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी से जूझ रहे हैं।

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who says Neurological disorders affect over 40 percent of global population
न्यूरोलॉजिकल रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

पिछले दो दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दुनियाभर में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। पहले जहां डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों के रूप में जाना जाता था, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने नॉन कम्युनिकेबल डिजीज का खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। 



मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हाल के वर्षों में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। पहले ये बीमारियां मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब युवा और बच्चों में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। तंत्रिका तंत्र हमारे पूरे शरीर के लिए सिग्नलिंग सिस्टम का काम करता है, ये मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों के माध्यम से शरीर को संदेश भेजता है। अगर यह सही से काम न करे तो शरीर की सारी कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।

इसी से संबंधित एक रिपोर्ट में डराने वाली जानकारियां सामने आई हैं। विशेषज्ञों ने बताया है कि  दुनिया की 40% आबादी तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियों से पीड़ित है। सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि कई देशों में इन रोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स की संख्या भी काफी कम है। 

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तंत्रिकाओं से संबंधित रोग - फोटो : Freepik.com

न्यूरोलॉजिकल रोगों को लेकर डब्ल्यूएचओ चिंतित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट ने एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट पर रोशनी डाली है। दुनिया की करीब 40% आबादी यानी 3 अरब से अधिक लोग किसी न किसी तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी से जूझ रहे हैं। हर साल इन बीमारियों के कारण 1.1 करोड़ से अधिक मौतें हो जाती हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि देशों ने जल्द कदम नहीं उठाए तो यह संकट सामाजिक और आर्थिक असमानता को और बढ़ा देगा। 

डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन न्यूरोलॉजी (2025) के अनुसार दुनिया के केवल 32% देशों के पास इन बीमारियों से निपटने की कोई राष्ट्रीय नीति या योजना है। कम आय वाले देशों में उच्च आय वाले देशों की तुलना में 80 गुना कम न्यूरोलॉजिस्ट (मस्तिष्क विशेषज्ञ) हैं।

सिर्फ 25% देश यानी 49 देश ही ऐसी बीमारियों को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) के तहत शामिल करते हैं, जिसका अर्थ है कि अरबों लोग बुनियादी उपचार से भी वंचित हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक स्ट्रोक (लकवा) की समस्या सबसे बड़ी चिंता है, जिसने करोड़ों लोगों की जान ली या उन्हें स्थायी रूप से अपंग बना दिया।

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न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com

तंत्रिका तंत बीमारियों की मुख्य वजह

विशेषज्ञ दुनियाभर में बढ़ती न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की मुख्य वजह आधुनिक जीवनशैली, पर्यावरणीय प्रदूषण और उम्रदराज होती आबादी का परिणाम मानते हैं। जैसे-जैसे औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ी है, वैसे-वैसे अल्जाइमर, पार्किंसन, डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का जोखिम भी कई गुना बढ़ गया है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2050 तक 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 2.1 अरब हो जाएगी, जिससे वैश्विक रोग-भार स्वतः बढ़ेगा।

दूसरी ओर निरंतर तनाव, नींद की कमी, असंतुलित खानपान और अत्यधिक स्क्रीन टाइम ने कॉर्टिसोल हार्मोन के स्तर को बढ़ाकर मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (स्मृति केंद्र) को कमजोर किया है, जो सोचने-निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करता है।

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न्यूरोलॉजिकल रोग बढ़ा रहे हैं चिंत - फोटो : Freepik.com

ऑटोइम्यून रोगों का भी जोखिम

संक्रमण और प्रतिरक्षा-संबंधी विकार भी अब मस्तिष्क रोगों के बड़े कारक बन चुके हैं। कोविड संक्रमण के बाद सामने आए पोस्ट-वायरल न्यूरोपैथी और ब्रेन फॉग जैसे लक्षण बताते हैं कि वायरल रोग भी न्यूरोलॉजिकल तंत्र को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकती हैं। खराब टीकाकरण वाले देशों में मेनिन्जाइटिस और नवजात एन्सेफैलोपैथी स्थायी मस्तिष्क क्षति का कारण बन रही हैं। इसके साथ ही अत्यधिक डिजिटल निर्भरता से स्मृति और एकाग्रता का क्षय समस्या बन बन चुका है।
 

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स्रोत
11 million lives lost each year: urgent action needed on neurological care

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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