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WHO Report: 17 फीसदी कपल प्रजनन समस्याओं-बांझपन के शिकार, इन दो आदतों को विशेषज्ञों ने बताया प्रमुख कारण

Sun, 20 Aug 2023 01:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 20 Aug 2023 01:55 PM IST
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WHO report on infertility problem, know Causes and prevention of infertility in hindi
बांझपन की बढ़ती समस्या - फोटो : iStock

प्रजनन संबंधी समस्याएं और बांझपन, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर चिंता है। समय के साथ इसका जोखिम और भी बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में 6 में से एक जोड़ा बांझपन की समस्या से परेशान है, जो कई प्रकार की सामाजिक नकारात्मकता को भी बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है। दुनिया की लगभग 17.5% वयस्क आबादी में यह जोखिम देखा जा रहा है, जिसके बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।



पुरुषों या महिलाओं में बांझपन जटिल और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है जो व्यक्तियों पर गहरा प्रभाव डालती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह जानना महत्वपूर्ण है कि बांझपन सिर्फ एक चिकित्सीय चिंता नहीं है, बल्कि इसके कारण सामाजिक रूप से भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

आइए जानते हैं कि यह समस्या क्यों बढ़ती जा रही है?

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प्रजनन विकारों की समस्या - फोटो : istock

बांझपन की समस्या

बांझपन, पुरुष या महिलाओं में प्रजनन प्रणाली की बीमारी है, जो 12 महीने या उससे अधिक समय तक नियमित यौन संबंध के बाद भी गर्भधारण न कर पाने का कारण बनती है। बांझपन की रोकथाम, निदान और उपचार को लेकर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। बांझपन के जोखिमों के कारण ही वैश्विक स्तर पर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसी सहायक प्रजनन तकनीक में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

आइए बांझपन की समस्या के कारण और इससे बचाव के उपायों के बारे में जानते हैं।

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क्यों हो रही है बांझपन की दिक्कत - फोटो : Pixabay

पुरुषों-महिलाओं में बांझपन की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बांझपन की समस्या किसी में भी हो सकती है, पुरुष और महिला दोनों इसके शिकार हो सकते हैं। कई प्रकार की लाइफस्टाइल और आहार संबंधी गड़बड़ी के कारण यह जोखिम तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याएं, अधिक उम्र और हार्मोनल समस्याएं भी इस जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिनसे बचाव को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बांझपन को बढ़ाने वाले दो कारणों को लेकर अलर्ट किया है।

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मोटापा के कारण बांझपन का खतरा - फोटो : iStock

अधिक वजन या मोटापे की समस्या

अमेरिकी महिलाओं पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि निष्क्रिय जीवनशैली और अधिक वजन होने से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है। पुरुषों में यह शुक्राणुओं की संख्या को भी प्रभावित करती है। शरीर का वजन अधिक होने के कारण कई प्रकार की अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का भी जोखिम अधिक हो सकता है, जो प्रजनन विकारों को बढ़ाने और बांझपन की समस्या का कारण बन सकती है।

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अल्कोहल के कारण बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Pixabay

शराब-धूम्रपान भी खतरा

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि बांझपन के खतरे को बढ़ाने के लिए शराब का सेवन भी बड़ा जोखिम कारक हो सकता है, इसके दुष्प्रभाव पुरुषों और महिलाओं दोनों में देखे जा रहे हैं। धूम्रपान प्रजनन उपचार की संभावित प्रभावशीलता को भी कम कर देता है इसके अलावा धूम्रपान करने वाली महिलाओं में गर्भपात की आशंका भी अधिक देखी जाती है।

इसी तरह से शराब को भी प्रजनन विकारों को बढ़ावा देने वाला पाया गया है। पुरुषों में शराब के सेवन से शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता कम हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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