नैपी खरीदते समय रखेंगी इन बातों का ध्यान तो बच्चे की त्वचा पर नहीं पड़ेंगे रैशेज़
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नैपी का कपड़ा मुलायम हो ताकि बच्चों की त्वचा को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। कोशिश करें की नैपी लिनेन या कॉटन के कपड़े की हो। नैपी के मल-मूत्र सोखने की क्षमता अधिक व अच्छी होनी चाहिए। साथ ही उसमें गीलापन दिखाने के लिए वेटनेस इंडिकेटर हो। जिसमें नैपी पर एक रंगीन रेखा होती है, जो पीले से नीली हो जाती है, तो इसका अर्थ होता है कि नैपी गीला हो गया है और इसे बदलने की जरूरत है।
अगर किसी बच्चे को ज्यादा डायपर पहनाने से त्वचा पर रैशेज हो जाते हैं और पैर और जांघों की त्वचा लाल पड़ जाती है तो तुरंत ही उस जगह पर ऐलोवेरा जेल लगाएं। साथ ही कुछ समय बच्चे को बिना नैपी के रहने दें और रैशेज वाली जगह पर बेबी क्रीम लगाएं।
ऐसा डायपर को लगातार पहनाने, त्वचा के रूखी हो जाने, नैपी के ठीक से न धोने या फिर साबुन के नैपी पर लगे रह जाने के कारण होता है।
बच्चे को गुनगुने व माइल्ड साबुन से नहलाएं। बच्चे को कॉटन के मुलायम तौलिये से साफ कर ही कपड़े व नैपी पहनाएं। गीले व गंदे नैपी को तुरंत ही साफ करें। रात में एक बार नैपी जरुर बदलें। दिन में 8 घंटे बच्चे को बिना नैपी के जरुर रहने दें, इससे उनकी त्वचा को हवा लग सकेगी। बच्चों के लिए हमेशा एयर टाइट प्लास्टिक कवर वाले नैपी ही इस्तेमाल करें। हर तीन से चार या ज्यादा से ज्यादा 6 घंटे बाद नैपी को जरूर बदल दें।