डॉ. परवेश मलिक
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
देश पहले से ही कोरोना वायरस से काफी परेशान है और इन सबके बीच देश की कई जगहों से रहस्यमय बीमारी यानी वायरल फीवर बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद और मुथरा में पिछले एक महीने में इस रहस्यमयी वायरल बुखार से बच्चों की मौत होने की खबरें सामने आ रही है। यही नहीं, बच्चों से जुड़े इस तरह के मामले (बच्चों को वायरल फीवर आना) दिल्ली, गाजियाबाद, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसी जगहों से भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन जगहों से मौत की खबर सामने नहीं आई है। यही नहीं, डॉक्टर्स मनाते हैं कि स्क्रब टाइफस के मामले अधिक घातक हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इस बुखार से बचा जाए। तो चलिए जानते हैं इस वायरल फीवर के बारे में।
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बच्चों को वायरल फीवर से बचाने के तरीके
- फोटो : iStock
क्या है स्क्रब टाइफस?
- दरअसल, अगर लंबे समय तक स्क्रब टाइफस को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो ये गुर्दे और यकृत को नुकसान पहुंचाने का कारण बनता है। इसके अलावा ये डिसेमिनेटेड इंट्रावास्कुलर कोगुलेशन यानी डीआईसी रक्तस्त्राव की प्रवृत्ति है और ये स्थिति रक्त के थक्के बनने और रक्तस्त्राव को रोकने की क्षमता को प्रभावित करने वाली स्थिति है।
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बच्चों को वायरल फीवर से बचाने के तरीके
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इसलिए है मृत्यु की संभावना ज्यादा
- इन दिनों ये जो वायरल फीवर यानी स्क्रब टाइफस चल रहे हैं, इसमें देखा जा रहा है कि बच्चों की मौत की संभावना काफी ज्यादा है। इस पर डॉक्टर्स का कहना है कि इस बीमारी के कारण बच्चों की त्वचा पर चकत्ते भी पड़ जाते हैं और वो सदमे में भी जा सकते हैं। इसलिए ही इस स्क्रब टाइफस से बच्चों की मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है।
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बच्चों को वायरल फीवर से बचाने के तरीके
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इन लक्षणों का रखें खास ध्यान
-बुखार आना
-पेट से जुड़ी दिक्कतें
-बुखार आना
-कम पेशाब आना
-शरीर पर चकत्ते होना
-शरीर का दर्द होना।
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बच्चों को वायरल फीवर से बचाने के तरीके
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ऐसे कर सकते हैं बचाव
- डॉक्टर्स मनाते हैं कि बच्चों को इससे बचाने के लिए ऐसी जगहों का खास ध्यान रखना है, जहां मच्छर प्रजनन करते हैं यानी मच्छर जन्म लेते हैं। इसके लिए घर में और घर के आसपास पानी जमा न होने दें, बच्चों को बाहर जाते समय मच्छर भगाने वाली दवा लगाएं, बासी खाना देने से बचें आदि। बच्चे को अगर 3-4 दिन 103-104 डिग्री सेल्सियस तक बुखार है, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं और अपने डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही अपनी मर्जी से कोई दवा न दें।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
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