कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के लोगों को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। 210 से ज्यादा देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं। रूस और चीन के बाद भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी समेत कई देश वायरस पर कामयाबी के करीब हैं। भारत में भी तीन वैक्सीन कैंडिडेट्स अंतिम चरणों के ट्रायल से गुजर रहे हैं। देश के लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें वैक्सीन मिलेगी। सरकार की ओर से व्यापक टीकाकरण के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। लेकिन लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने की राह में चुनौतियां भी ढेर सारी हैं। वैक्सीन के उत्पादन से लेकर इसके वितरण तक सरकार को कई तरह की तैयारियां करनी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोरोना वैक्सीन को लेकर दो बड़ी बातें कही हैं।
2 of 6
Coronavirus Vaccine
- फोटो : Freepic / Amar Ujala
देश नौ महीने से ज्यादा समय से कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है। लोगों को बेसब्री से कोरोना वैक्सीन का इंतजार है, लेकिन आम लोगों के लिए यह इंतजार लंबा हो सकता है। एम्स यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना की वैक्सीन के लिए आम लोगों को एक साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
3 of 6
दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया
- फोटो : ANI
देश में कोरोना वायरस प्रबंधन के लिए बनाई गई 'नेशनल टास्क फोर्स' के सदस्य बताते चलें कि डॉ. रणदीप गुलेरिया सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि हमारे देश में जनसंख्या काफी ज्यादा है, लेकिन वैक्सीन समय की जरूरत है। ऐसे में समय पर बाजार में लिमिटेड वैक्सीन उपलब्ध कराना वास्तव में एक आदर्श स्थिति होगी।
4 of 6
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : twitter
क्या होंगी चुनौतियां
डॉ. गुलेरिया ने आगे कहा कि हमें सबसे ज्यादा ध्यान वैक्सीन के वितरण पर देना होगा, ताकि यह देश के हर हिस्से तक पहुंच सके। उन्होंने कहा, 'कोल्ड चेन को बनाए रखना, पर्याप्त सीरिंज और पर्याप्त सुई उपलब्ध कराना तो चुनौती है ही, बड़ी चुनौती देश के सुदूर हिस्सों तक वैक्सीन की पहुंच को आसान बनाना है। वैक्सीन की स्थिति का पता लगाना भी बड़ी चुनौती है कि यह कितनी प्रभावी साबित होगी।
5 of 6
डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स
- फोटो : Social Media
पहले जो वैक्सीन आएगी, उसकी तुलना में बाद में आने वाली वैक्सीन कितनी ज्यादा प्रभावी होगी, यह भी एक सवाल है। एम्स के निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा, यदि बाद में हमारे पास एक दूसरा टीका आ जाता है और वो पहले वाले से ज्यादा प्रभावी होता है, तो यह अहम होगा। हम इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं? यह कैसे तय करें कि किसे पहले टीके की जरूरत है और किसे दूसरे टीके की जरूरत है? इस तरह के कई अहम निर्णय लेने की जरूरत है।