आर्थराइटिस-जोड़ों में दर्द की समस्या, सभी उम्र के लोगों में देखी जा रही है। कुछ दशकों पहले तक इसे बस उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतों के तौर पर जाना जाता था हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द, या हाथ-पैरों की उंगलियों में सूजन को अक्सर आप नजरअंदाज कर देते हैं तो ये गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। ये आर्थराइटिस (Arthritis) के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
Arthritis Risk: महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा पुरुषों से अधिक, पर क्यों? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से
- पुरुषों की तुलना में महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा कहीं अधिक है। यह सिर्फ उम्र या कैल्शियम की कमी का मामला नहीं, बल्कि हार्मोनल बदलाव, इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रियाएं और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं भी इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
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महिलाओं में आर्थराइटिस के मामले
अमेरिकन कॉलेज ऑफ रूमेटोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों और जोड़ों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। मेनोपॉज (आमतौर पर 50 की उम्र) के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से महिलाओं में हड्डियों और जोड़ों की मजबूती भी कम हो जाती है, जिससे आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एमआईएच) की रिपोर्ट के अनुसार, रुमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है जो महिलाओं में पुरुषों से 2-3 गुना ज्यादा अधिक देखी जाती है।
- इसके अलावा गर्भावस्था और प्रसव के दौरान वजन बढ़ना और पेल्विक हड्डियों पर दबाव, आगे चलकर घुटनों और कूल्हों में आर्थराइटिस की संभावना बढ़ा देता है।
क्यों बढ़ता जा रहा है ये जोखिम?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि 40 साल के बाद 60% महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। भारत में 70% महिलाएं विटामिन डी की कमी से जूझ रही हैं, जो जोड़ों की सेहत के लिए और भी दिक्कतें बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है।
हालांकि अच्छी बात ये है कि आप पहले से ही कुछ बातों का ध्यान रखकर आर्थराइटिस के जोखिमों को कम कर सकती हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी, वजन बढ़ना और अनुचित खानपान आपमें गठिया का जोखिम बढ़ाने वाला हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि आप लाइफस्टाइल को ठीक रखें।
किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
सभी महिलाओं को आर्थराइटिस हो ये जरूरी नहीं है हालांकि कुछ लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
मेनोपॉज के बाद की महिलाओं को अधिक सावधान रहना चाहिए। हार्मोनल बदलाव जोड़ों को कमजोर करते हैं, जिससे आपको अधिक खतरा हो सकता है। इसके अलावा गर्भवती या हाल ही में मां बनी महिलाएं, जिनके परिवार में पहले से किसी को आर्थराइटिस की दिक्कत रही हो, अधिक वजन या मोटापा की शिकार महिलाओं में भी खतरा अधिक होता है, इन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आर्थराइटिस से बचे रहने के लिए क्या करें?
- पौष्टिक आहार का सेवन जैसे कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर चीजें दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां खाना आपके लिए फायदेमंद है।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी के बीज) और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स (हल्दी, लहसुन, अदरक) को भी आहार में शामिल करें।
- नियमित व्यायाम करें: हल्की स्ट्रेचिंग और योग जैसे अभ्यास फायदेमंद हैं। वॉकिंग, साइकिलिंग और तैराकी से जोड़ों को लचीला बनाए रखा जा सकता है।
- अधिक वजन होने से भी घुटनों पर दबाव बढ़ जाता है, इसलिए वजन कम करें।
- हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए मेनोपॉज के बाद डॉक्टर से हड्डियों की सेहत को लेकर सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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