लिवर की बीमारियां साल दर साल तेजी से बढ़ती जा रही हैं। कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। हमारा लिवर, खून को संसाधित करने, पोषक तत्वों का ब्रेक डाउन करके उन्हें संतुलित करने में मदद करता है। हालांकि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण लिवर से संबंधित कई तरह की समस्याओं का जोखिम हो सकता है।लिवर सिरोसिस ऐसी ही गंभीर स्थिति है जिसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण लिवर फेलियर तक का भी खतर हो सकता है।
Liver Cirrhosis: अक्सर रहता है पीलिया और त्वचा में खुजली? कहीं आपको लिवर सिरोसिस की समस्या तो नहीं
लिवर सिरोसिस का बढ़ता खतरा
लिवर सिरोसिस वैश्विक स्तर पर बढ़ती समस्या है। क्रोनिक हेपेटाइटिस संक्रमण की स्थिति में लिवर सिरोसिस होने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। इसके लक्षण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि शुरुआत में लोगों का इस तरफ ध्यान कम जाता है। आइए जानते हैं कि किन लक्षणों के आधार पर इस समस्या का निदान किया जा सकता है?
लिवर सिरोसिस के संकतों पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है।
क्या आपको भी अक्सर रहती है पीलिया?
अक्सर बनी रहने वाली पीलिया की समस्या को लिवर से संबंधित बीमारियों का संकेत माना जाता है।
लिवर में होने वाली समस्या या इसके ठीक से काम न करने की स्थिति में लिवर बिलीरुबिन नामक तत्व को ठीक तरीके से शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता है। बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने के कारण आपको आंखों और त्वचा में पीलापन नजर आने लगता, जिसे पीलिया कहते हैं। अगर आपको अक्सर पीलिया की समस्या बनी रहती है तो इस बारे में किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। ये लिवर की गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है।
त्वचा से संबंधित दिक्कतें
लिवर की बीमारियों के कारण त्वचा से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। लिवर सिरोसिस के कारण आपको अक्सर त्वचा में खुजली बनी रहती है। लिवर सिरोसिस और लिवर की अन्य बीमारियों के कारण पित्त का स्तर बढ़ा जाता है जो त्वचा के नीचे जमा होने लगता है। इससे त्वचा में अक्सर खुजली की दिक्कत हो सकती है। अगर आपको भी अक्सर पीलिया और त्वचा से संबंधित समस्याएं बनी रहती हैं तो इसपर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है।
लिवर सिरोसिस के इन लक्षणों के बारे में भी जानना जरूरी
लिवर के कार्य में होने वाली दिक्कत या फिर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के कारण आपको पीलिया, प्रुरिटस (त्वचा में खुजली) के अलावा भी कई प्रकार की दिक्कतें होने लगती हैं। इन संकेतों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
- पेशाब का रंग गहरा होना।
- पाचन संबंधी कठिनाइयां, विशेष रूप से वसा वाली चीजों का पाचन कठिन होना।
- त्वचा या पलकों पर वसा के छोटे पीले धब्बे नजर आना।
- बिना प्रयास के वजन घटना और मांसपेशियों का कम होना।
- हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (भ्रम, मूड में बदलाव)।
- मोटर डिसफंक्शन (मांसपेशियों पर नियंत्रण में कठिनाई, ऐंठन)
- मासिक धर्म चक्र में अनियमितता की समस्या।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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