वायरल इंफेक्शन का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में बुखार, सर्दी-जुकाम वाली बीमारी आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ वायरस ऐसे भी हैं जो शरीर में लंबे समय तक बने रहें तो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं?
अलर्ट: क्या वायरल संक्रमण भी बन सकते हैं कैंसर का कारण? जान लीजिए ये खतरे
कुछ वायरस लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। एचपीवी कई कैंसर, हेपेटाइटिस बी और सी लिवर कैंसर, ईबीवी कुछ लिम्फोमा और अन्य कैंसर को जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं। लेकिन वायरस से संक्रमित हर व्यक्ति को कैंसर होगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक एचपीवी, हेपेटाइटिस-बी और सी, एपस्टीन-बार वायरस और कुछ अन्य वायरस कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
एचपीवी से सर्वाइकल कैंसर का खतरा
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी को महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला पाया गया है।
- अध्ययनों से पता चलता है कि खास तौर पर एचपीवी-16 और एचपीवी-18 स्ट्रेन से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है।
- इसके अलावा इसे वायरस गुदा, लिंग, योनि, वल्वा और गले के कुछ हिस्सों के कैंसर के लिए भी जिम्मेदार पाया गया है।
- अच्छी बात यह है कि एचपीवी संक्रमण के कारण होने वाले कैंसर को रोकने के लिए टीके मौजूद हैं।
हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस का लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला पाया गया है। क्रॉनिक संक्रमण में ये जोखिम और भी बढ़ जाता है।
- हेपेटाइटिस बी और सी मुख्य रूप से संक्रमित रक्त और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलते हैं।
- इलाज के दौरान एक ही सुई या सिरिंज को दोबारा इस्तेमाल करने और बिना जांच किया हुआ संक्रमित खून चढ़ाने से संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है।
- हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है। इसलिए संक्रमण की रोकथाम करके कैंसर के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
एपस्टीन-बार वायरस से ब्लड कैंसर
एपस्टीन-बार वायरस यानी ईबीवी बहुत आम वायरस है और दुनिया के ज्यादातर लोग जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित होते हैं। ज्यादातर लोगों में इससे कैंसर नहीं होता।
- हालांकि ईबीवी कुछ लोगों में लिम्फोमा और नाक-गले से जुड़े कुछ कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
- इस वायरस से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या खाने की चीजें साझा करने से बचें और हाथ धोने का आदत बनाना जरूरी है।
दुर्लभ वायरस भी हो सकते हैं कैंसर का कारण
एचटीएलवी-1 या ह्यूमन टी-लिम्फोट्रोपिक वायरस टाइप-1, एक प्रकार का रेट्रोवायरस है जो मुख्य रूप से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण श्वेत रक्त कोशिकाओं (टी-कोशिकाओं) को संक्रमित करता है। कुछ लोगों में ये एडल्ट टी-सेल ल्यूकेमिया का कारण बन सकता है। वहीं एचएचवी-8 या कपोसी सारकोमा से जुड़ा हर्पीस वायरस कपोसी सारकोमा समेत कुछ दुर्लभ कैंसर से जुड़ा पाया गया है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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