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Omicron Variant: ऐसे लोगों को पड़ रही है ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत, बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने इस बात पर दिया जोर

Sat, 08 Jan 2022 03:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Jan 2022 03:42 PM IST
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unvaccinated omicron infected may need oxygen support, study emphasis on booster dose
ओमिक्रॉन के कारण गंभीर मामले - फोटो : istock

भारत सहित दुनियाभर में इस समय कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बना हुआ है। अध्ययनों में पाया गया है कि ओमिक्रॉन, अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट है जो आसानी से लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। जिन लोगों को टीके की दोनों डोज मिल चुकी है उन्हें भी कोरोना के इस खतरे से सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। यही कारण है स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन की दोनों डोज भले ही संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी नहीं है, हालांकि यह रोग की गंभीरता और कोरोना के कारण होने वाली मौत के जोखिम को कम करने में विशेष कारगर मानी जाती है। ऐसे में सभी लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों डोज ले लेनी चाहिए।



वैक्सीन आपके लिए किस तरह से मददगार हो सकती है, इसको लेकर हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में साफ पता चलता है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने बताया है कि मुंबई के तमाम अस्पतालों में ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती करीब 96 फीसदी कोरोना संक्रमित वह लोग हैं जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं वैक्सीन किस तरह से आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है।

unvaccinated omicron infected may need oxygen support, study emphasis on booster dose
वैक्सीनेशन न कराने वालों को ऑक्सीजन की जरूरत - फोटो : iStock

क्या है स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ विवेक सहाय बताते हैं, दुनियाभर में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों ने सभी की चिंता बढ़ा दी है, फिर भी राहत इस बात की है कि इस बार अधिकतर लोगों को टीकाकरण हो चुका है। अब तक हुए अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि वैक्सीन, गंभीर रोग और संक्रमितों के आईसीयू की जरूरतों को काफी हद तक कम करने में सफल रही हैं। हालांकि जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उन्हें भी बचाव के उपायों को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

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कोरोना से बचाव के वैक्सीनेशन जरूरी - फोटो : PTI

वैक्सीन कैसे करती हैं काम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीन, भविष्य में किसी वायरस के संपर्क में आने के दौरान उससे मुकाबले के लिए शरीर में एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती हैं। कोरोना से पहले चेचक, फ्लू जैसी कई बीमारियों के लिए भी लोगों का टीकाकरण किया जाता रहा है। वैक्सीनेशन करा चके लोगों को बीमारियां तो होती रही हैं, लेकिन इसकी गंभीरता कम हो जाती है।

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बीमारी की गंभीरता को कम करती है वैक्सीन - फोटो : Pixabay

ओमिक्रॉन वैरिएंट पर टीके का असर
ओमिक्रॉन पर टीकों के प्रभाव को लेकर सामने आए डेटा से पता चलता है कि मौजूदा वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ बहुत ज्यादा असरदार नहीं हैं। विशेषज्ञ बताते हैं, टीके संक्रमण को रोकने में लगभग 30-40 फीसदी तक प्रभावी हो सकते हैं हालांकि अच्छी बात यह है कि कोरोना के कारण होने वाली गंभीर बीमारी को रोकने में इन्हें 70-80 फीसदी तक असरदार पाया गया है। यही कारण है कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है उन्हें ओमिक्रॉन से संक्रमण के चलते अस्पतालों में भर्ती होने या ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

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बूस्टर खुराक की जरूरत - फोटो : Pixabay

ओमिक्रॉन के खिलाफ कैसे मिलेगी सुरक्षा?
जर्नल सेल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए एक अतिरिक्त यानी कि “बूस्टर” खुराक की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों ने अमेरिकी लोगों पर किए गए अध्ययन के आधार पर बताया कि मौजूदा टीकों के पारंपरिक खुराक ओमिक्रॉन वैरिएंट को पहचानने और बेअसर करने वाली एंटीबॉडी का उत्पादन करने में सक्षम नजर नहीं आ रहे हैं, ऐसे में बूस्टर डोज देकर लोगों को ओमिक्रॉन जैसे वैरिएंट्स से सुरक्षित किया जा सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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