जब भी बात हमारे स्वास्थ्य की होती है, तो मन में कई तरह की चिताएं जरूर आती हैं। बात कोरोना महामारी की ही करें तो इस बीमारी ने क्या आम और क्या खास, हर किसी को डराकर रख दिया। कोरोना ने लाखों लोगों की जान ले ली और करोड़ों लोगों को इस बीमारी का शिकार भी होना पड़ा। इसी को ध्यान में रखते हुए देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रूपये के बजट की घोषणा भी की। इन सबके बीच एक सवाल हमेशा उठता है कि आखिर क्यों हेल्थ के लिए भारत में क्रांति की जरूरत है? तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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बजट 2021: प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
दरअसल, कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत के कई अस्पतालों में हालात बेहद गंभीर थे। फिर चाहे वो दिल्ली का एम्स अस्पताल हो या फिर मुंबई का लीलावती अस्पताल। हर जगह कोरोना मरीजों की भारी भीड़ थी। लोगों को अस्पतालों में भर्ती करने के लिए जगह तक कम पड़ गई थी। कई जगह से तो डरावनी तस्वीरें तक सामने आई थी, जहां लाश के बगल में ही मरीजों का इलाज होने जैसी चीजें देखने को मिली थी। इन तस्वीरों ने हर किसी को भयभीत तक कर दिया था।
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बजट 2021: प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
अगर ये कहा जाए कि कोरोना काल के दौरान भारत की स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा था, तो गलत नहीं होगा। शुरुआत में इस वायरस ने जिस तरह तेजी से लोगों को अपनी चपेट में लिया, वो बेहद डराने वाला था। हालांकि, हमारे देश के डॉक्टर्स से लेकर सपोर्टिंग स्टाफ ने लोगों को वायरस से बचाने और ठीक करने में अहम रोल निभाया। इस दौरान डॉक्टर्स से लेकर अस्पताल के स्टाफ की भी भारी कमी देखने को मिली थी, जिसके कारण कई-कई दिनों तक डॉक्टर्स और स्टाफ को अस्पताल में रहना पड़ा था।
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- फोटो : पीटीआई
यही नहीं, अस्पतालों में जगह की भी भारी दिक्कत का सामना हर किसी को करना पड़ा था। ऐसे में देश के कई हिस्सों में जगह-जगह पर अस्थाई अस्पताल तक बनाए गए थे, और भारतीय रेलवे के कोचों में भी इस तरह की व्यवस्था की गई ताकि आने वाले समय में लोगों का समय रहते इलाज किया जा सके। शायद इन सब बातों ने सरकार को देश के हेल्थ सेक्टर पर खर्च करने के लिए सोचने को मजबूर किया, तभी तो आज कोरोना वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के बजट का ऐलान किया गया।
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इसके अलावा 64 हजार 180 करोड़ रुपए के बजट के साथ प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना शुरू होगी। ये बजट नई बीमारियों के इलाज के लिए भी होगा। साथ ही 70 हजार गांवों के वेलनेस सेंटर्स को इससे मदद मिलेगी। 602 जिलों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल शुरू होंगे। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल को मजबूत किया जाएगा। लेकिन सबसे जरूरी ये है कि ये तैयारी इसलिए भी की जाए ताकि भविष्य में हम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह तैयार रहें, और कोई भी अपना इलाज करवा सके। एक आम आदमी के लिए सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था ऐसी हो कि उसे किसी भी तरह की तकलीफ न हो।